Nityaनित्य
जय अम्बे गौरी
Jai Ambe Gauri
जय अम्बे गौरी माँ दुर्गा की सबसे ज़्यादा गाई जाने वाली हिंदी आरतियों में से एक है, जिसमें उन्हें अम्बे, गौरी और श्यामा कहा गया है। टेक और बारह पदों में सिंह पर विराजी देवी के तेजस्वी रूप का और महिषासुर, शुम्भ-निशुम्भ, चण्ड-मुण्ड व रक्तबीज पर उनकी विजय का वर्णन है। नवरात्रि की हर शाम, अक्सर गरबा से पहले, और मंगलवार व शुक्रवार को इसे गाते हैं।
टेक
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
हे अम्बे गौरी, आपकी जय हो! हे मैया श्यामा गौरी, आपकी जय हो! विष्णु, ब्रह्मा और शिव दिन-रात आपका ध्यान करते हैं।
पद १
माँग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥
आपकी माँग में सिंदूर शोभित है और माथे पर कस्तूरी का टीका है। आपके दोनों नेत्र उज्ज्वल हैं और चंद्रमा-सा मुख अत्यंत सुंदर है।
टेक
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
पद २
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥
आपकी देह स्वर्ण के समान दमकती है और लाल वस्त्र शोभा पाते हैं। गले में लाल फूलों की माला सुशोभित है।
टेक
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
पद ३
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥
आप सिंह पर विराजमान हैं और खड्ग व खप्पर धारण करती हैं। देवता, मनुष्य और मुनिजन आपकी सेवा करते हैं और आप उनके दुख हरती हैं।
टेक
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
पद ४
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥
कानों में कुण्डल शोभित हैं और नाक के अग्रभाग पर मोती है। आपकी ज्योति करोड़ों चंद्रमाओं और सूर्यों के समान दमकती है।
टेक
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
पद ५
शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥
आपने शुम्भ और निशुम्भ को विदीर्ण किया और महिषासुर का वध किया। धूम्रलोचन का अंत करने वाले आपके नेत्र दिन-रात दिव्य मद से भरे रहते हैं।
टेक
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
पद ६
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
आपने चण्ड-मुण्ड का संहार किया और रक्तबीज को नष्ट किया, जिसके रक्त की हर बूँद से नया दैत्य जन्म लेता था। आपने मधु और कैटभ दोनों को मारा और देवताओं को निर्भय किया।
टेक
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
पद ७
ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥
आप ही ब्रह्माणी, रुद्राणी और कमला (लक्ष्मी) रानी हैं। आगम और निगम (वेद) आपका बखान करते हैं; आप शिव की पटरानी हैं।
टेक
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
पद ८
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥
चौंसठ योगिनियाँ मंगल-गीत गाती हैं और भैरव नृत्य करते हैं। ताल और मृदंग बजते हैं और डमरू भी गूँजता है।
टेक
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
पद ९
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥
आप ही जगत की माता हैं और आप ही उसका भरण-पोषण करती हैं। आप भक्तों के दुख हरती हैं और उन्हें सुख-सम्पत्ति देती हैं।
टेक
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
पद १०
भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर-नारी॥
आपकी चारों भुजाएँ अत्यंत शोभायमान हैं और आप वर-मुद्रा धारण करती हैं। जो नर-नारी आपकी सेवा करते हैं, वे मनचाहा फल पाते हैं।
टेक
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
पद ११
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥
सोने के थाल में अगर, कपूर और बाती सजी है। श्रीमालकेतु में यह ज्योति करोड़ों रत्नों के समान दमकती है।
टेक
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
समापन
श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥
शिवानंद स्वामी कहते हैं कि जो कोई श्री अम्बे जी की यह आरती गाता है, उसे सुख और सम्पत्ति प्राप्त होती है।