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Nityaनित्य

वक्रतुण्ड महाकाय

Vakratunda Mahakaya

वक्रतुण्ड महाकाय गणेश जी का दो पंक्तियों का संस्कृत श्लोक है, और सबसे ज़्यादा बोले जाने वाले श्लोकों में से एक है। इसमें करोड़ों सूर्यों जैसे तेज वाले, टेढ़ी सूँड वाले प्रभु से विनती है कि वे हमारे सभी काम बिना विघ्न के पूरे करें। परंपरा से इसे हर पूजा, पढ़ाई, यात्रा या नए काम से पहले बोलते हैं, और बुधवार व गणेश चतुर्थी पर ११, २१ या १०८ बार जपते हैं।

मंत्र

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

हे टेढ़ी सूँड और विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी प्रभु! हे देव, मेरे सभी कार्यों को सदा विघ्नरहित कीजिए।

स्रोत: Traditional Ganesha invocation (cross-checked: shlokam.org "Vakratunda Mahakaya"; bhaktibharat.com "Vakratunda Mahakaya Ganesh Shlok"; drikpanchang.com Vakratunda Mahakaya Mantra)

ये अर्थ हमारा पहला मसौदा हैं। अभी किसी विद्वान ने इनकी जाँच नहीं की है। कोई भूल दिखे तो हमें ज़रूर बताएँ।

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