पाठ पर लौटें

यह पाठ प्रिंट करें

लिपि और विकल्प चुनें, फिर प्रिंट करें या PDF सहेजें।

Nityaनित्य

जय पार्वती माता

Jai Parvati Mata

जय पार्वती माता शिव जी की अर्धांगिनी और गणेश जी की माता, देवी पार्वती की छोटी-सी हिंदी आरती है। इसकी टेक और सात पदों में सती के रूप में और फिर हिमालय की पुत्री के रूप में उनके जन्म, शुम्भ-निशुम्भ पर विजय और शिव जी के साथ उनके आनंद की याद है। महिलाएँ इसे तीज, करवा चौथ, गौरी पूजा और सोमवार को गाती हैं।

टेक

जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।

ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥

हे पार्वती माता, आपकी जय हो! आप सनातन ब्रह्मस्वरूपा देवी हैं और शुभ फल देने वाली हैं।

पद १

अरिकुल कंटक नाशिनि, जय सेवक त्राता।

जग जननी जगदम्बा, हरिहर गुण गाता॥

आप शत्रुओं के समूह को काँटों की तरह नष्ट करती हैं। हे सेवकों की रक्षा करने वाली, आपकी जय हो! आप जगत की जननी जगदम्बा हैं; विष्णु और शिव आपके गुण गाते हैं।

टेक

जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।

ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥

पद २

सिंह को वाहन साजे, कुण्डल है साथा।

देव वधू जस गावत, नृत्य करत ताथा॥

सिंह की सवारी आपकी शोभा बढ़ाती है और कानों में कुण्डल हैं। देवताओं की पत्नियाँ आपका यश गाती हैं और 'ता था' की ताल पर नाचती हैं।

टेक

जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।

ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥

पद ३

सतयुग रूप शील अतिसुन्दर, नाम सती कहलाता।

हेमांचल घर जन्मी, सखियन संग राता॥

सतयुग में अत्यंत सुंदर रूप और शील वाली आप सती कहलाईं। फिर आपने हिमालय के घर जन्म लिया और सखियों के संग आनंद से रहीं।

टेक

जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।

ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥

पद ४

शुम्भ निशुम्भ विदारे, हेमांचल स्थाता।

सहस्र भुजा तनु धरि के, चक्र लियो हाथा॥

हिमालय पर निवास करने वाली आपने शुम्भ-निशुम्भ को चीर डाला। हज़ार भुजाओं वाला रूप धरकर आपने हाथ में चक्र लिया।

टेक

जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।

ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥

पद ५

सृष्टि रूप तुही है जननी, शिव संग रंगराता।

नन्दी भृंगी बीन लही, सारा जग मदमाता॥

हे जननी, आप ही सृष्टि का रूप हैं और शिव जी के संग आनंद में रँगी रहती हैं। नन्दी और भृंगी वीणा उठाते हैं, और सारा जग आनंद में मग्न हो जाता है।

टेक

जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।

ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥

पद ६

देवन अरज करत हम, चरण ध्यान लाता।

तेरी कृपा रहे तो, मन नहिं भरमाता॥

देवताओं की तरह हम भी आपसे विनती करते हैं और आपके चरणों में ध्यान लगाते हैं। आपकी कृपा बनी रहे तो मन नहीं भटकता।

टेक

जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।

ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥

समापन

मैया जी की आरती, भक्ति भाव से जो नर गाता।

नित्य सुखी रह करके, सुख सम्पत्ति पाता॥

जो मनुष्य भक्ति भाव से मैया जी की आरती गाता है, वह सदा सुखी रहकर सुख-सम्पत्ति पाता है।

स्रोत: Traditional Hindi aarti as printed in popular aarti-sangrah booklets; cross-checked line by line against BhaktiBharat.com, Drik Panchang (Hindi) and Bharat Discovery (bharatdiscovery.org)

ये अर्थ हमारा पहला मसौदा हैं। अभी किसी विद्वान ने इनकी जाँच नहीं की है। कोई भूल दिखे तो हमें ज़रूर बताएँ।

getnitya.com/hi/parvati/jai-parvati-mata/