PDF डाउनलोड करें
A4 पर मुफ़्त PDF, हर पद के अर्थ सहित। छापें, बाँटें, सहेज कर रखें।
Nityaनित्य
काकड आरती करीतों साईनाथ देवा
Kakad Aarti Karito Sainath Deva
"काकड आरती करीतों" वह भजन है जिससे शिरडी की सुबह की आरती का नाम पड़ा है। के. जे. भीष्म के लिखे इस मराठी भजन में एक टेक और तीन पद हैं। इसमें सुबह का दीपक भीतर की साधना का रूप बन जाता है: बाती हमारे दोषों से बनी है, घी वैराग्य का है और लौ गुरु-भक्ति की। शिरडी में और काकड आरती करने वाले साईं मंदिरों में यह भोर से पहले गाया जाता है।
टेक
काकड आरती करीतों साईनाथ देवा ।
चिन्मयरूप दाखवीं घेउनि बालक-लघुसेवा ॥
हे साईनाथ देव, मैं आपकी काकड आरती करता हूँ। अपने बालक की यह छोटी सी सेवा स्वीकार कीजिए और अपना चिन्मय (शुद्ध चैतन्य) रूप दिखाइए।
पद १
काम क्रोध मद मत्सर आटुनी कांकडा केला ।
वैराग्याचे तूप घालुनी मी तो भिजविला ।
साईनाथगुरुभक्तिज्वलनें तो मी पेटविला ।
तद्वृत्ती जाळुनी गुरुनें प्रकाश पाडिला ।
द्वैत-तमा नासूनी मिळवी तत्स्वरूपीं जीवा ॥
काम, क्रोध, मद और मत्सर को बटकर मैंने काकडा (बाती) बनाया। उसे वैराग्य के घी में भिगोया। साईनाथ गुरु की भक्ति की आग से उसे जलाया। उन वृत्तियों को जलाकर गुरु ने प्रकाश फैलाया। द्वैत का अँधेरा मिटाकर वे जीव को उसके सच्चे स्वरूप से मिला देते हैं।
टेक
काकड आरती करीतों साईनाथ देवा ।
चिन्मयरूप दाखवीं घेउनि बालक-लघुसेवा ॥
पद २
भू-खेचर व्यापूनी अवघे हृत्कमलीं राहसी ।
तोचि दत्तदेव तू शिरडी राहुनी पावसी ।
राहुनि येथे अन्यत्रहि तू भक्तांस्तव धांवसी ।
निरसुनियां संकटा दासा अनुभव दाविसी ।
न कळे त्वल्लीलाही कोण्या देवा वा मानवा ॥
धरती और आकाश में व्याप्त होकर आप सबके हृदय-कमल में रहते हैं। आप वही दत्तदेव हैं, जो शिरडी में रहकर कृपा करते हैं। यहाँ रहते हुए भी आप भक्तों के लिए दूसरी जगह दौड़ जाते हैं। दासों के संकट मिटाकर उन्हें अपना अनुभव कराते हैं। आपकी लीला न किसी देवता की समझ में आती है, न किसी मनुष्य की।
टेक
काकड आरती करीतों साईनाथ देवा ।
चिन्मयरूप दाखवीं घेउनि बालक-लघुसेवा ॥
पद ३
त्वद्यशदुंदुभीनें सारें अंबर हें कोंदलें ।
सगुण मूर्ति पाहण्या आतुर जन शिरडी आले ।
प्राशुनि त्वद्वचनामृत अमुचे देहभान हरपलें ।
सोडूनियां दुरभिमान मानस त्वच्चरणीं वाहिले ।
कृपा करूनियां साईमाउले दास पदरीं घ्यावा ॥
आपके यश की दुंदुभी से सारा आकाश भर गया है। आपकी सगुण मूर्ति देखने को उत्सुक लोग शिरडी आए हैं। आपके वचनों का अमृत पीकर हमें देह की सुध नहीं रही। झूठा अभिमान छोड़कर हमने अपना मन आपके चरणों में अर्पित कर दिया। हे साईं माउली, कृपा करके इस दास को अपने आँचल में ले लीजिए।
टेक
काकड आरती करीतों साईनाथ देवा ।
चिन्मयरूप दाखवीं घेउनि बालक-लघुसेवा ॥