Nityaनित्य
जय गणेश देवा
Jai Ganesh Deva
जय गणेश देवा गणेश जी की सबसे लोकप्रिय हिंदी आरतियों में से एक है। यह "जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती पिता महादेवा" से शुरू होती है। इसमें एक टेक और पाँच छोटे पद हैं, जिनमें एकदंत, दयालु गणेश जी का गुणगान है; एक पद में "सूर श्याम" की छाप है। ज़्यादातर घरों में पूजा इसी आरती से शुरू होती है, और बुधवार, संकष्टी चतुर्थी तथा गणेश चतुर्थी की हर शाम इसे गाते हैं।
टेक
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
जय हो गणेश जी की, जय हो भगवान गणेश की, जिनकी माता पार्वती हैं और पिता महादेव हैं।
पद १
एकदंत दयावंत चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी॥
वे एक दाँत वाले, दयालु और चार भुजाओं वाले हैं; उनके मस्तक पर सिंदूर शोभा पाता है और मूषक उनकी सवारी है।
टेक
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
पद २
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥
उन्हें पान चढ़ाए जाते हैं, फूल चढ़ाए जाते हैं और मेवे भी; लड्डुओं का भोग लगता है और संत उनकी सेवा करते हैं।
टेक
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
पद ३
अंधन को आँख देत कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥
वे अंधों को आँखें देते हैं और रोग से पीड़ितों को निरोगी काया; निःसंतानों को संतान देते हैं और निर्धनों को धन।
टेक
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
पद ४
सूर श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
श्याम के भक्त सूर आपकी शरण में आए हैं। हे प्रभु, जिनकी माता पार्वती और पिता महादेव हैं, इस सेवा को सफल कीजिए।
टेक
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
पद ५
दीनन की लाज रखो शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जाऊँ बलिहारी॥
हे शंभु-सुत, दीनों की लाज रखो। हमारी कामनाएँ पूरी करो, मैं आप पर बलिहारी जाता हूँ।
टेक
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥