जय गणेश देवा
Jai Ganesh Deva
जय गणेश देवा गणेश जी की सबसे लोकप्रिय हिंदी आरतियों में से एक है। यह "जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती पिता महादेवा" से शुरू होती है। इसमें एक टेक और पाँच छोटे पद हैं, जिनमें एकदंत, दयालु गणेश जी का गुणगान है; एक पद में "सूर श्याम" की छाप है। ज़्यादातर घरों में पूजा इसी आरती से शुरू होती है, और बुधवार, संकष्टी चतुर्थी तथा गणेश चतुर्थी की हर शाम इसे गाते हैं।
- 6 पद
- 4 मिनट
- पारंपरिक (अंतिम पंक्ति में "सूर श्याम" की छाप; प्रायः सूरदास से जोड़ी जाती है)
- उत्तम दिन: बुधवार
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।Jai Ganesh Jai Ganesh Jai Ganesh Deva
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥Mata Jaki Parvati Pita Mahadeva
जय हो गणेश जी की, जय हो भगवान गणेश की, जिनकी माता पार्वती हैं और पिता महादेव हैं।
एकदंत दयावंत चार भुजा धारी।Ek Dant Dayavant Char Bhuja Dhari
माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी॥Mathe Sindoor Sohe Moose Ki Savari
वे एक दाँत वाले, दयालु और चार भुजाओं वाले हैं; उनके मस्तक पर सिंदूर शोभा पाता है और मूषक उनकी सवारी है।
कुछ पुस्तकों में "माथे पर तिलक सोहे" पाठ है।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।Jai Ganesh Jai Ganesh Jai Ganesh Deva
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥Mata Jaki Parvati Pita Mahadeva
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।Paan Chadhe Phool Chadhe Aur Chadhe Meva
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥Ladduan Ka Bhog Lage Sant Karen Seva
उन्हें पान चढ़ाए जाते हैं, फूल चढ़ाए जाते हैं और मेवे भी; लड्डुओं का भोग लगता है और संत उनकी सेवा करते हैं।
Variants: "हार चढ़े" (garlands) for "पान चढ़े"; "फल चढ़े" (fruit) for "फूल चढ़े".
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।Jai Ganesh Jai Ganesh Jai Ganesh Deva
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥Mata Jaki Parvati Pita Mahadeva
अंधन को आँख देत कोढ़िन को काया।Andhan Ko Aankh Det Kodhin Ko Kaya
बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥Banjhan Ko Putra Det Nirdhan Ko Maya
वे अंधों को आँखें देते हैं और रोग से पीड़ितों को निरोगी काया; निःसंतानों को संतान देते हैं और निर्धनों को धन।
यह पद गणेश जी की करुणा की भक्तिमय स्तुति है।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।Jai Ganesh Jai Ganesh Jai Ganesh Deva
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥Mata Jaki Parvati Pita Mahadeva
सूर श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।Soor Shyam Sharan Aaye Safal Kije Seva
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥Mata Jaki Parvati Pita Mahadeva
श्याम के भक्त सूर आपकी शरण में आए हैं। हे प्रभु, जिनकी माता पार्वती और पिता महादेव हैं, इस सेवा को सफल कीजिए।
इस पंक्ति में "सूर श्याम" की छाप है; परंपरा इसे प्रायः भक्त कवि सूरदास से जोड़ती है, पर यह निश्चित नहीं है।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।Jai Ganesh Jai Ganesh Jai Ganesh Deva
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥Mata Jaki Parvati Pita Mahadeva
दीनन की लाज रखो शंभु सुतकारी।Deenan Ki Laaj Rakho Shambhu Sutkari
कामना को पूर्ण करो जाऊँ बलिहारी॥Kamna Ko Poorn Karo Jaoon Balihari
हे शंभु-सुत, दीनों की लाज रखो। हमारी कामनाएँ पूरी करो, मैं आप पर बलिहारी जाता हूँ।
Sung in the popular recordings after the "Sur Shyam" stanza. Variants: "शम्भु सुतवारी", "जग बलिहारी" / "जय बलिहारी" (drikpanchang, bhaktilok).
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।Jai Ganesh Jai Ganesh Jai Ganesh Deva
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥Mata Jaki Parvati Pita Mahadeva
पूर्ण
जय गणेश देवा का पाठ पूर्ण हुआ।
इसे साप्ताहिक नियम बनाएँ
आपके फ़ोन के कैलेंडर में हर हफ़्ते का रिमाइंडर जुड़ जाएगा। न साइन-अप, न कोई जानकारी बाहर जाती है।
iPhone या iPad पर: शेयर बटन दबाएँ, फिर “Add to Home Screen” चुनें।
प्रश्न
जय गणेश देवा आरती कब गाई जाती है?
लगभग हर पूजा की शुरुआत में, क्योंकि गणेश जी की पूजा सबसे पहले होती है। बहुत से घरों में यह रोज़ सुबह-शाम भी गाई जाती है। बुधवार, संकष्टी चतुर्थी और गणेश चतुर्थी के दसों दिन, विसर्जन तक, यह आरती ज़रूर होती है।
पूजा में सबसे पहले गणेश जी की आरती क्यों होती है?
क्योंकि हर पूजा में गणेश जी का पूजन पहले होता है। परंपरा उन्हें विघ्नहर्ता मानती है, इसलिए कोई भी शुभ काम उन्हीं से शुरू करते हैं।
जय गणेश देवा आरती किसने लिखी?
पक्का किसी को नहीं पता। यह पारंपरिक आरती है। एक पद में "सूर श्याम शरण आए" आता है, यानी श्याम के भक्त सूर शरण में आए हैं। इसी वजह से बहुत से लोग इसे सूरदास की रचना मानते हैं, पर इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं है। इसलिए हम इसे "सूर श्याम" छाप वाली पारंपरिक आरती कहते हैं।
क्या जय गणेश देवा और सुखकर्ता दुःखहर्ता एक ही आरती हैं?
नहीं। "जय गणेश देवा" हिंदी आरती है, जो पूरे उत्तर भारत में और विदेश में बसे परिवारों में गाई जाती है। "सुखकर्ता दुःखहर्ता" संत समर्थ रामदास की मराठी आरती है। महाराष्ट्र में, ख़ासकर गणेशोत्सव में, यही सबसे प्रिय है। बहुत से परिवार दोनों आरतियाँ एक के बाद एक गाते हैं।
इस आरती में कितना समय लगता है?
लगभग चार मिनट, हर पद के बाद टेक दोहराते हुए।
स्रोत और समीक्षा
स्रोत: Traditional Hindi aarti as given by drikpanchang.com "Shri Ganesh Ji Ki Aarti", cross-checked with prabhatkhabar.com (Anuradha Paudwal version) and bhaktilok.in
Stanza order and wording follow the widely sung Anuradha Paudwal recording as transcribed by prabhatkhabar.com; drikpanchang lists the same stanzas and gives "माथे पर तिलक सोहे", "हार चढ़े", "अँधे को" and "शम्भु सुतवारी … जग बलिहारी" as alternatives (see stanza notes). bhaktilok.in omits the "Sur Shyam" stanza. Quotation marks around "सूर" in some prints are omitted here.
मूल पाठ को यहाँ बताए गए स्रोतों से पंक्ति-दर-पंक्ति मिलाया गया है। अर्थ AI की मदद से लिखा गया मसौदा हैं। अभी किसी विद्वान ने इनकी जाँच नहीं की है।
ये अर्थ हमारा पहला मसौदा हैं। अभी किसी विद्वान ने इनकी जाँच नहीं की है। कोई भूल दिखे तो हमें ज़रूर बताएँ।