Nityaनित्य
करवा चौथ व्रत कथा
Karwa Chauth Vrat Katha
करवा चौथ व्रत कथा वह कहानी है जो सुहागिनें करवा चौथ की शाम, चाँद निकलने से पहले, पढ़ती या सुनती हैं। मुख्य कथा वीरावती की है, जिसके सात भाइयों ने नकली चाँद दिखाकर उसका व्रत तुड़वा दिया, और जिसने फिर पूरी निष्ठा से व्रत रखकर अपना सुहाग वापस पाया। दूसरी छोटी कथा पतिव्रता करवा की है, जिसने अपने पति को मगरमच्छ से बचाया।
वीरावती · १
बहुत पुराने समय की बात है। एक नगर में एक साहूकार रहता था। उसके सात बेटे थे और एक बेटी, जिसका नाम वीरावती था। सातों भाई अपनी इकलौती बहन को बहुत प्यार करते थे और उसे खिलाए बिना ख़ुद खाना नहीं खाते थे।
साहूकार की इकलौती बेटी वीरावती और उसे बहुत प्यार करने वाले सात भाई।
वीरावती · २
वीरावती का विवाह हुआ। विवाह के बाद जब पहला करवा चौथ आया, तब वह अपने मायके में थी। उसने अपनी भाभियों के साथ सुबह से निर्जल व्रत रखा। दिन भर न कुछ खाया, न पानी पिया।
विवाह के बाद पहले करवा चौथ पर वीरावती ने मायके में भाभियों के साथ निर्जल व्रत रखा।
वीरावती · ३
शाम होते-होते भूख और प्यास से वीरावती बेहाल हो गई। भाई घर लौटे तो बहन को मुरझाया हुआ देखकर उनसे रहा नहीं गया। उन्होंने कहा, “बहन, कुछ खा लो।” वीरावती बोली, “आज करवा चौथ है। चाँद को अर्घ्य देकर ही खाऊँगी।”
शाम तक वीरावती भूख-प्यास से बेहाल हो गई, पर उसने चाँद से पहले खाने से मना कर दिया।
वीरावती · ४
चाँद निकलने में अभी बहुत देर थी। भाइयों ने एक उपाय सोचा। सबसे छोटा भाई दूर एक पीपल के पेड़ पर चढ़ गया और उसने दीया जलाकर छलनी की ओट में रख दिया। दूर से वह रोशनी ऐसी लगती थी, जैसे चाँद निकल आया हो।
भाइयों ने पेड़ पर छलनी के पीछे दीया रखकर नकली चाँद बना दिया।
वीरावती · ५
भाई बहन के पास आए और बोले, “देखो, चाँद निकल आया है। अर्घ्य दे दो।” भाभियों ने उसे समझाना चाहा कि यह चाँद नहीं है, पर भोली वीरावती ने भाइयों की बात मान ली। उसने उस रोशनी को अर्घ्य दिया और खाना खाने बैठ गई।
भाइयों की बात मानकर वीरावती ने नकली चाँद को अर्घ्य दिया और व्रत खोल दिया।
वीरावती · ६
पहले कौर में बाल निकला। दूसरे कौर पर उसे छींक आ गई। तीसरा कौर उठाया ही था कि ससुराल से ख़बर आई कि उसके पति अब इस संसार में नहीं रहे।
तीसरे कौर से पहले ही ससुराल से पति की मृत्यु की ख़बर आ गई।
वीरावती · ७
वीरावती रोती-बिलखती ससुराल पहुँची। उसी रात इंद्र की पत्नी, देवी इंद्राणी, धरती पर आईं। वीरावती ने उनके चरण पकड़ लिए और पूछा, “मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ?” इंद्राणी ने कहा, “तुमने असली चाँद देखे बिना व्रत खोल दिया। तुम्हारे भाइयों ने प्रेम में आकर तुमसे छल किया था।”
इंद्राणी ने वीरावती को बताया कि असली चाँद देखे बिना व्रत खोलने से यह हुआ।
वीरावती · ८
इंद्राणी ने आगे कहा, “अब पूरे वर्ष हर महीने की चौथ का व्रत श्रद्धा से रखो। अगले करवा चौथ पर पूरे नियम से व्रत करो और असली चाँद को अर्घ्य दो। तब तुम्हारा सुहाग लौट आएगा।”
इंद्राणी ने साल भर हर चौथ का व्रत और अगले करवा चौथ का पूरा व्रत करने को कहा।
वीरावती · ९
वीरावती ने किसी को अपने पति का दाह-संस्कार नहीं करने दिया। वह पूरे वर्ष उनके पास बैठी रही, उनकी सेवा करती रही और हर महीने की चौथ का व्रत रखती रही। मन ही मन वह करवा माता का स्मरण करती रहती थी।
वीरावती साल भर पति के पास बैठकर सेवा करती रही और हर चौथ का व्रत रखती रही।
वीरावती · १०
फिर करवा चौथ आया। इस बार वीरावती ने सुबह से निर्जल व्रत रखा, शाम को करवा भरकर गौरी माँ की पूजा की और कथा सुनी। जब असली चाँद निकला, तब उसने छलनी से चाँद को देखा और अर्घ्य दिया।
अगले करवा चौथ पर वीरावती ने पूरे नियम से व्रत और पूजा की और असली चाँद को अर्घ्य दिया।
वीरावती · ११
उसकी सच्ची श्रद्धा से करवा माता प्रसन्न हुईं। उनके आशीर्वाद से वीरावती का पति ऐसे उठ बैठा, जैसे गहरी नींद से जागा हो। कहते हैं, तभी से सुहागिनें यह व्रत पूरे नियम से रखती हैं और चाँद को देखकर, अर्घ्य देकर ही व्रत खोलती हैं।
करवा माता की कृपा से वीरावती का पति जीवित हो उठा; तभी से चाँद देखकर ही व्रत खोला जाता है।
करवा · १
अब करवा माता की दूसरी कथा सुनिए। बहुत पहले एक नदी के किनारे बसे गाँव में करवा नाम की एक पतिव्रता स्त्री अपने पति के साथ रहती थी। एक दिन उसका पति नदी में नहाने गया।
दूसरी कथा: नदी किनारे रहने वाली पतिव्रता करवा और उसका पति।
करवा · २
नहाते समय एक मगरमच्छ ने उसका पैर पकड़ लिया और उसे पानी में खींचने लगा। पति ने ज़ोर से करवा को पुकारा। करवा दौड़कर आई और उसने कच्चे सूत के धागे से मगर को बाँध दिया। उसके सतीत्व के बल से मगर ऐसा बँधा कि हिल भी न सका।
मगरमच्छ ने पति को पकड़ा, तो करवा ने उसे कच्चे सूत से बाँध दिया।
करवा · ३
फिर करवा यमराज के पास पहुँची और बोली, “हे यमराज, इस मगर ने मेरे पति को पकड़ा है। इसे अपने लोक ले जाइए और मेरे पति को लंबी आयु दीजिए।” यमराज ने कहा, “अभी इस मगर की आयु बाक़ी है। मैं इसे नहीं ले जा सकता।”
करवा ने यमराज से मगर को ले जाने और पति को लंबी आयु देने की विनती की।
करवा · ४
करवा ने कहा, “यदि आप ऐसा नहीं करेंगे, तो मैं आपको शाप दे दूँगी।” पतिव्रता के शाप से यमराज भी डर गए। उन्होंने मगर को यमलोक भेज दिया और करवा के पति को लंबी आयु का वरदान दिया।
करवा के शाप के डर से यमराज ने मगर को यमलोक भेजा और पति को लंबी आयु दी।
करवा · ५
तभी से करवा को करवा माता के रूप में याद किया जाता है। करवा चौथ पर सुहागिनें उनसे अपने पति की रक्षा और लंबी आयु की प्रार्थना करती हैं।
तभी से करवा को करवा माता के रूप में पूजा जाता है।
समापन प्रार्थना
हे करवा माता, जैसे आपने वीरावती का सुहाग लौटाया और करवा के पति की रक्षा की, वैसे ही सबके सुहाग की रक्षा करना। बोलो करवा माता की जय!
करवा माता से सबके सुहाग की रक्षा की प्रार्थना।