करवा चौथ व्रत कथा
Karwa Chauth Vrat Katha
करवा चौथ व्रत कथा वह कहानी है जो सुहागिनें करवा चौथ की शाम, चाँद निकलने से पहले, पढ़ती या सुनती हैं। मुख्य कथा वीरावती की है, जिसके सात भाइयों ने नकली चाँद दिखाकर उसका व्रत तुड़वा दिया, और जिसने फिर पूरी निष्ठा से व्रत रखकर अपना सुहाग वापस पाया। दूसरी छोटी कथा पतिव्रता करवा की है, जिसने अपने पति को मगरमच्छ से बचाया।
- 17 पद
- 10 मिनट
- पारंपरिक कथा; यह पुनर्कथन नित्या का है
बहुत पुराने समय की बात है। एक नगर में एक साहूकार रहता था। उसके सात बेटे थे और एक बेटी, जिसका नाम वीरावती था। सातों भाई अपनी इकलौती बहन को बहुत प्यार करते थे और उसे खिलाए बिना ख़ुद खाना नहीं खाते थे।Bahut purane samay ki baat hai. Ek nagar mein ek sahukar rehta tha. Uske saat bete the aur ek beti, jiska naam Veeravati tha. Saaton bhai apni iklauti behan ko bahut pyaar karte the aur use khilaye bina khud khana nahin khate the.
साहूकार की इकलौती बेटी वीरावती और उसे बहुत प्यार करने वाले सात भाई।
वीरावती का विवाह हुआ। विवाह के बाद जब पहला करवा चौथ आया, तब वह अपने मायके में थी। उसने अपनी भाभियों के साथ सुबह से निर्जल व्रत रखा। दिन भर न कुछ खाया, न पानी पिया।Veeravati ka vivah hua. Vivah ke baad jab pehla Karwa Chauth aaya, tab vah apne maayke mein thi. Usne apni bhabhiyon ke saath subah se nirjal vrat rakha. Din bhar na kuchh khaya, na paani piya.
विवाह के बाद पहले करवा चौथ पर वीरावती ने मायके में भाभियों के साथ निर्जल व्रत रखा।
शाम होते-होते भूख और प्यास से वीरावती बेहाल हो गई। भाई घर लौटे तो बहन को मुरझाया हुआ देखकर उनसे रहा नहीं गया। उन्होंने कहा, “बहन, कुछ खा लो।” वीरावती बोली, “आज करवा चौथ है। चाँद को अर्घ्य देकर ही खाऊँगी।”Shaam hote-hote bhookh aur pyaas se Veeravati behaal ho gayi. Bhai ghar laute to behan ko murjhaya hua dekhkar unse raha nahin gaya. Unhone kaha, “Behan, kuchh kha lo.” Veeravati boli, “Aaj Karwa Chauth hai. Chaand ko arghya dekar hi khaungi.”
शाम तक वीरावती भूख-प्यास से बेहाल हो गई, पर उसने चाँद से पहले खाने से मना कर दिया।
चाँद निकलने में अभी बहुत देर थी। भाइयों ने एक उपाय सोचा। सबसे छोटा भाई दूर एक पीपल के पेड़ पर चढ़ गया और उसने दीया जलाकर छलनी की ओट में रख दिया। दूर से वह रोशनी ऐसी लगती थी, जैसे चाँद निकल आया हो।Chaand nikalne mein abhi bahut der thi. Bhaiyon ne ek upaay socha. Sabse chhota bhai door ek peepal ke ped par chadh gaya aur usne diya jalakar chhalni ki ot mein rakh diya. Door se vah roshni aisi lagti thi, jaise chaand nikal aaya ho.
भाइयों ने पेड़ पर छलनी के पीछे दीया रखकर नकली चाँद बना दिया।
भाई बहन के पास आए और बोले, “देखो, चाँद निकल आया है। अर्घ्य दे दो।” भाभियों ने उसे समझाना चाहा कि यह चाँद नहीं है, पर भोली वीरावती ने भाइयों की बात मान ली। उसने उस रोशनी को अर्घ्य दिया और खाना खाने बैठ गई।Bhai behan ke paas aaye aur bole, “Dekho, chaand nikal aaya hai. Arghya de do.” Bhabhiyon ne use samjhana chaha ki yah chaand nahin hai, par bholi Veeravati ne bhaiyon ki baat maan li. Usne us roshni ko arghya diya aur khana khane baith gayi.
भाइयों की बात मानकर वीरावती ने नकली चाँद को अर्घ्य दिया और व्रत खोल दिया।
पहले कौर में बाल निकला। दूसरे कौर पर उसे छींक आ गई। तीसरा कौर उठाया ही था कि ससुराल से ख़बर आई कि उसके पति अब इस संसार में नहीं रहे।Pehle kaur mein baal nikla. Doosre kaur par use chheenk aa gayi. Teesra kaur uthaya hi tha ki sasural se khabar aayi ki uske pati ab is sansar mein nahin rahe.
तीसरे कौर से पहले ही ससुराल से पति की मृत्यु की ख़बर आ गई।
वीरावती रोती-बिलखती ससुराल पहुँची। उसी रात इंद्र की पत्नी, देवी इंद्राणी, धरती पर आईं। वीरावती ने उनके चरण पकड़ लिए और पूछा, “मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ?” इंद्राणी ने कहा, “तुमने असली चाँद देखे बिना व्रत खोल दिया। तुम्हारे भाइयों ने प्रेम में आकर तुमसे छल किया था।”Veeravati roti-bilakhti sasural pahunchi. Usi raat Indra ki patni, Devi Indrani, dharti par aayin. Veeravati ne unke charan pakad liye aur poochha, “Mere saath aisa kyon hua?” Indrani ne kaha, “Tumne asli chaand dekhe bina vrat khol diya. Tumhare bhaiyon ne prem mein aakar tumse chhal kiya tha.”
इंद्राणी ने वीरावती को बताया कि असली चाँद देखे बिना व्रत खोलने से यह हुआ।
बहुत से परिवार यह अंश इंद्राणी के स्थान पर पार्वती माँ या करवा माता के साथ सुनाते हैं। कथा की सीख वही रहती है।
इंद्राणी ने आगे कहा, “अब पूरे वर्ष हर महीने की चौथ का व्रत श्रद्धा से रखो। अगले करवा चौथ पर पूरे नियम से व्रत करो और असली चाँद को अर्घ्य दो। तब तुम्हारा सुहाग लौट आएगा।”Indrani ne aage kaha, “Ab poore varsh har mahine ki chauth ka vrat shraddha se rakho. Agle Karwa Chauth par poore niyam se vrat karo aur asli chaand ko arghya do. Tab tumhara suhaag laut aayega.”
इंद्राणी ने साल भर हर चौथ का व्रत और अगले करवा चौथ का पूरा व्रत करने को कहा।
वीरावती ने किसी को अपने पति का दाह-संस्कार नहीं करने दिया। वह पूरे वर्ष उनके पास बैठी रही, उनकी सेवा करती रही और हर महीने की चौथ का व्रत रखती रही। मन ही मन वह करवा माता का स्मरण करती रहती थी।Veeravati ne kisi ko apne pati ka daah-sanskar nahin karne diya. Vah poore varsh unke paas baithi rahi, unki seva karti rahi aur har mahine ki chauth ka vrat rakhti rahi. Man hi man vah Karwa Mata ka smaran karti rehti thi.
वीरावती साल भर पति के पास बैठकर सेवा करती रही और हर चौथ का व्रत रखती रही।
फिर करवा चौथ आया। इस बार वीरावती ने सुबह से निर्जल व्रत रखा, शाम को करवा भरकर गौरी माँ की पूजा की और कथा सुनी। जब असली चाँद निकला, तब उसने छलनी से चाँद को देखा और अर्घ्य दिया।Phir Karwa Chauth aaya. Is baar Veeravati ne subah se nirjal vrat rakha, shaam ko karva bharkar Gauri Maa ki pooja ki aur katha suni. Jab asli chaand nikla, tab usne chhalni se chaand ko dekha aur arghya diya.
अगले करवा चौथ पर वीरावती ने पूरे नियम से व्रत और पूजा की और असली चाँद को अर्घ्य दिया।
उसकी सच्ची श्रद्धा से करवा माता प्रसन्न हुईं। उनके आशीर्वाद से वीरावती का पति ऐसे उठ बैठा, जैसे गहरी नींद से जागा हो। कहते हैं, तभी से सुहागिनें यह व्रत पूरे नियम से रखती हैं और चाँद को देखकर, अर्घ्य देकर ही व्रत खोलती हैं।Uski sachchi shraddha se Karwa Mata prasann huin. Unke aashirvaad se Veeravati ka pati aise uth baitha, jaise gehri neend se jaaga ho. Kehte hain, tabhi se suhaagin yah vrat poore niyam se rakhti hain aur chaand ko dekhkar, arghya dekar hi vrat kholti hain.
करवा माता की कृपा से वीरावती का पति जीवित हो उठा; तभी से चाँद देखकर ही व्रत खोला जाता है।
अब करवा माता की दूसरी कथा सुनिए। बहुत पहले एक नदी के किनारे बसे गाँव में करवा नाम की एक पतिव्रता स्त्री अपने पति के साथ रहती थी। एक दिन उसका पति नदी में नहाने गया।Ab Karwa Mata ki doosri katha suniye. Bahut pehle ek nadi ke kinare base gaon mein Karva naam ki ek pativrata stri apne pati ke saath rehti thi. Ek din uska pati nadi mein nahane gaya.
दूसरी कथा: नदी किनारे रहने वाली पतिव्रता करवा और उसका पति।
यह अलग और छोटी कथा है, जो बहुत से परिवारों में वीरावती की कथा के बाद सुनाई जाती है। यहाँ करवा एक स्त्री का नाम है; यही शब्द पूजा के मिट्टी के पात्र के लिए भी आता है।
नहाते समय एक मगरमच्छ ने उसका पैर पकड़ लिया और उसे पानी में खींचने लगा। पति ने ज़ोर से करवा को पुकारा। करवा दौड़कर आई और उसने कच्चे सूत के धागे से मगर को बाँध दिया। उसके सतीत्व के बल से मगर ऐसा बँधा कि हिल भी न सका।Nahate samay ek magarmachh ne uska pair pakad liya aur use paani mein kheenchne laga. Pati ne zor se Karva ko pukara. Karva daudkar aayi aur usne kachche soot ke dhaage se magar ko baandh diya. Uske satitva ke bal se magar aisa bandha ki hil bhi na saka.
मगरमच्छ ने पति को पकड़ा, तो करवा ने उसे कच्चे सूत से बाँध दिया।
फिर करवा यमराज के पास पहुँची और बोली, “हे यमराज, इस मगर ने मेरे पति को पकड़ा है। इसे अपने लोक ले जाइए और मेरे पति को लंबी आयु दीजिए।” यमराज ने कहा, “अभी इस मगर की आयु बाक़ी है। मैं इसे नहीं ले जा सकता।”Phir Karva Yamraj ke paas pahunchi aur boli, “He Yamraj, is magar ne mere pati ko pakda hai. Ise apne lok le jaiye aur mere pati ko lambi aayu dijiye.” Yamraj ne kaha, “Abhi is magar ki aayu baaki hai. Main ise nahin le ja sakta.”
करवा ने यमराज से मगर को ले जाने और पति को लंबी आयु देने की विनती की।
करवा ने कहा, “यदि आप ऐसा नहीं करेंगे, तो मैं आपको शाप दे दूँगी।” पतिव्रता के शाप से यमराज भी डर गए। उन्होंने मगर को यमलोक भेज दिया और करवा के पति को लंबी आयु का वरदान दिया।Karva ne kaha, “Yadi aap aisa nahin karenge, to main aapko shaap de doongi.” Pativrata ke shaap se Yamraj bhi dar gaye. Unhone magar ko Yamlok bhej diya aur Karva ke pati ko lambi aayu ka vardaan diya.
करवा के शाप के डर से यमराज ने मगर को यमलोक भेजा और पति को लंबी आयु दी।
तभी से करवा को करवा माता के रूप में याद किया जाता है। करवा चौथ पर सुहागिनें उनसे अपने पति की रक्षा और लंबी आयु की प्रार्थना करती हैं।Tabhi se Karva ko Karwa Mata ke roop mein yaad kiya jata hai. Karwa Chauth par suhaagin unse apne pati ki raksha aur lambi aayu ki prarthana karti hain.
तभी से करवा को करवा माता के रूप में पूजा जाता है।
हे करवा माता, जैसे आपने वीरावती का सुहाग लौटाया और करवा के पति की रक्षा की, वैसे ही सबके सुहाग की रक्षा करना। बोलो करवा माता की जय!He Karwa Mata, jaise aapne Veeravati ka suhaag lautaya aur Karva ke pati ki raksha ki, vaise hi sabke suhaag ki raksha karna. Bolo Karwa Mata ki jai!
करवा माता से सबके सुहाग की रक्षा की प्रार्थना।
परिवार अपने शब्दों में ऐसी ही किसी पंक्ति से कथा पूरी करते हैं। बहुत से लोग इसके बाद करवे को और बड़ों को प्रणाम करते हैं।
पूर्ण
करवा चौथ व्रत कथा का पाठ पूर्ण हुआ।
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प्रश्न
क्या करवा चौथ की कथा अंग्रेज़ी में पढ़ सकते हैं?
हाँ। परंपरा में ज़रूरी यह है कि कथा श्रद्धा से कही और सुनी जाए, उस भाषा में जो आप समझते हैं। विदेश में बहुत से परिवार इस पेज के रोमन अक्षरों से हिंदी पढ़ते हैं और फिर अंग्रेज़ी अर्थ, ताकि घर की नई पीढ़ी भी समझ सके।
कथा कब पढ़ी जाती है?
शाम को, पूजा सजाने के बाद और चाँद निकलने से पहले। स्त्रियाँ करवे और थालियाँ लेकर घेरे में बैठती हैं, एक जन कथा पढ़ती है और थालियाँ घुमाई जाती हैं। बहुत से घरों में कथा सुनते समय हाथ में गेहूँ या चावल के कुछ दाने रखते हैं और बाद में उन्हें अर्पित करते हैं।
बादल हों या चाँद न दिखे तो क्या करें?
अपने शहर के चंद्रोदय के समय के अनुसार चलें। बहुत-सी स्त्रियाँ वह समय निकल जाने पर चाँद की दिशा, आमतौर पर पूर्व, की ओर मुँह करके अर्घ्य देती हैं और व्रत खोलती हैं। कुछ परिवार कहीं और रहने वाले किसी रिश्तेदार के चाँद देख लेने का इंतज़ार करते हैं। जैसा आपके घर का चलन हो, वैसा करें।
गर्भवती हों या तबीयत ठीक न हो तो क्या पानी पी सकते हैं?
हाँ। परंपरा में सेहत के लिए व्रत में छूट हमेशा रही है, और सेहत पहले है। ऐसी स्थिति में बहुत-सी स्त्रियाँ दिन में पानी, दूध या फल ले लेती हैं और शाम की पूजा, कथा और अर्घ्य पूरे करती हैं। परिवार और अपने डॉक्टर से बात कर लें।
स्रोत और समीक्षा
स्रोत: Nitya's retelling of the traditional story (Hindi, 2026), written for this site; not a transcription of any printed edition
Nitya's retelling of the traditional story. There is no single canonical wording of the Karwa Chauth katha; it is told in many family and booklet versions. Our retelling follows the elements common to the most widely told version: the merchant's daughter Veeravati and her seven brothers; her first Karwa Chauth fast at her parents' home; the youngest brother's false moon (a lamp behind a sieve on a peepal tree; some tell it as a fire behind a hill); the three omens at the meal (a hair, a sneeze, the news); Indrani's explanation (many families tell it with Parvati or Karva Mata); a year of monthly Chauth fasts beside her husband's body; and his return to life on the next Karwa Chauth. Some versions end with the youngest sister-in-law restoring him; we have not used that ending. Part two follows the common story of Karva, the crocodile bound with raw cotton thread, and Yama. The Hindi is our own wording, not copied from any book or website. Meanings are retellings of each paragraph; the Hindi meaning is a one-line gist.
मूल पाठ और अर्थ, दोनों अभी पहले मसौदे के रूप में हैं।
ये अर्थ हमारा पहला मसौदा हैं। अभी किसी विद्वान ने इनकी जाँच नहीं की है। कोई भूल दिखे तो हमें ज़रूर बताएँ।