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Nityaनित्य

श्री शनिदेव जी की आरती

Shani Dev Aarti

"जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी" सूर्य और छाया के पुत्र शनिदेव की छोटी-सी पारंपरिक हिंदी आरती है। एक टेक और चार पदों में उनके श्याम रूप और नीले वस्त्रों का वर्णन है, उन्हें प्रिय भोग (तिल, तेल, उड़द और लोहा) गिनाए गए हैं और उनकी शरण माँगी गई है। इसे शनिवार को शनि पूजा के अंत में, आम तौर पर शनि चालीसा के बाद, गाते हैं।

टेक

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।

सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥

भक्तों का हित करने वाले श्री शनिदेव की जय हो, जय हो। हे प्रभु, आप सूर्यदेव के पुत्र हैं और छाया आपकी माता हैं।

पद १

श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी।

नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥

आपका शरीर श्याम है, दृष्टि टेढ़ी है और आप चार भुजाएँ धारण करते हैं। हे नाथ, आप नीले वस्त्र पहनते हैं और हाथी की सवारी करते हैं।

टेक

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।

सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥

पद २

क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी।

मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥

आपके सिर पर किरीट मुकुट शोभा पाता है और ललाट चमकता है। गले में मोतियों की माला सुशोभित है; मैं आप पर बलिहारी जाता हूँ।

टेक

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।

सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥

पद ३

मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।

लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥

आपको मोदक, मिठाई, पान और सुपारी चढ़ती है। लोहा, तिल, तेल, उड़द और भैंस आपको बहुत प्रिय हैं।

टेक

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।

सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥

पद ४

देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी।

विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥

देवता, दानव, ऋषि, मुनि और सब नर-नारी आपका स्मरण करते हैं। विश्वनाथ आपका ध्यान धरते हैं; हम आपकी शरण में हैं।

टेक

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।

सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥

स्रोत: Traditional Hindi aarti as given by BhaktiBharat.com (aarti/shri-shani-dev-ji) and Bharat Discovery / Bharatkosh (शनिदेव जी की आरती), cross-checked with the copy printed after the Shani Chalisa on sanskritdocuments.org (doc_z_otherlang_hindi/shani40)

ये अर्थ हमारा पहला मसौदा हैं। अभी किसी विद्वान ने इनकी जाँच नहीं की है। कोई भूल दिखे तो हमें ज़रूर बताएँ।

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