श्री शनिदेव जी की आरती

Shani Dev Aarti

"जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी" सूर्य और छाया के पुत्र शनिदेव की छोटी-सी पारंपरिक हिंदी आरती है। एक टेक और चार पदों में उनके श्याम रूप और नीले वस्त्रों का वर्णन है, उन्हें प्रिय भोग (तिल, तेल, उड़द और लोहा) गिनाए गए हैं और उनकी शरण माँगी गई है। इसे शनिवार को शनि पूजा के अंत में, आम तौर पर शनि चालीसा के बाद, गाते हैं।

  • 5 पद
  • 3 मिनट
  • पारंपरिक
  • उत्तम दिन: शनिवार

किसी भी पद को छुएँ, उसका शब्दार्थ और भावार्थ खुल जाएगा।

चमकती पंक्ति के साथ-साथ पाठ करें।

पाठ के अंत पर जाएँ

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।Jai Jai Shri Shanidev Bhaktan Hitkari

सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥Suraj Ke Putra Prabhu Chhaya Mahatari

भक्तों का हित करने वाले श्री शनिदेव की जय हो, जय हो। हे प्रभु, आप सूर्यदेव के पुत्र हैं और छाया आपकी माता हैं।

श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी।Shyam Ank Vakra Drisht Chaturbhuja Dhari

नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥Neelambar Dhar Nath Gaj Ki Asvari

आपका शरीर श्याम है, दृष्टि टेढ़ी है और आप चार भुजाएँ धारण करते हैं। हे नाथ, आप नीले वस्त्र पहनते हैं और हाथी की सवारी करते हैं।

टेक

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।Jai Jai Shri Shanidev Bhaktan Hitkari

सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥Suraj Ke Putra Prabhu Chhaya Mahatari

क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी।Kreet Mukut Sheesh Rajit Dipat Hai Lilari

मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥Muktan Ki Mala Gale Shobhit Balihari

आपके सिर पर किरीट मुकुट शोभा पाता है और ललाट चमकता है। गले में मोतियों की माला सुशोभित है; मैं आप पर बलिहारी जाता हूँ।

टेक

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।Jai Jai Shri Shanidev Bhaktan Hitkari

सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥Suraj Ke Putra Prabhu Chhaya Mahatari

मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।Modak Mishthan Paan Chadhat Hain Supari

लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥Loha Til Tel Udad Mahishi Ati Pyari

आपको मोदक, मिठाई, पान और सुपारी चढ़ती है। लोहा, तिल, तेल, उड़द और भैंस आपको बहुत प्रिय हैं।

टेक

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।Jai Jai Shri Shanidev Bhaktan Hitkari

सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥Suraj Ke Putra Prabhu Chhaya Mahatari

देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी।Dev Danuj Rishi Muni Sumirin Nar Nari

विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥Vishwanath Dharat Dhyan Sharan Hain Tumhari

देवता, दानव, ऋषि, मुनि और सब नर-नारी आपका स्मरण करते हैं। विश्वनाथ आपका ध्यान धरते हैं; हम आपकी शरण में हैं।

टेक

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।Jai Jai Shri Shanidev Bhaktan Hitkari

सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥Suraj Ke Putra Prabhu Chhaya Mahatari

पूर्ण

श्री शनिदेव जी की आरती का पाठ पूर्ण हुआ।

इसे साप्ताहिक नियम बनाएँ

आपके फ़ोन के कैलेंडर में हर हफ़्ते का रिमाइंडर जुड़ जाएगा। न साइन-अप, न कोई जानकारी बाहर जाती है।

PDF डाउनलोड करें

A4 पर मुफ़्त PDF, हर पद के अर्थ सहित। छापें, बाँटें, सहेज कर रखें।

प्रश्न

शनिदेव की आरती कब गाई जाती है?

शनिवार को शनि पूजा के अंत में, आम तौर पर शनि चालीसा के बाद। बहुत लोग इसे शाम को तिल के तेल का दीपक जलाकर गाते हैं, और शनि जयंती व शनि अमावस्या पर भी।

क्या शनिवार शाम को आरती कर सकते हैं?

हाँ, ज़्यादातर लोग शाम को ही गाते हैं। दीपक जलाइए, टेक गाइए, फिर हर पद के बाद टेक दोहराइए।

शनिदेव को क्या चढ़ाते हैं?

आरती में ही सामान्य भोग गिनाए गए हैं: तिल, तिल का तेल, उड़द और लोहा, साथ में मिठाई और पान। घर पर तिल के तेल का दीपक और थोड़े काले तिल काफ़ी हैं।

क्या शनिदेव से डरना चाहिए?

नहीं। परंपरा उन्हें न्याय करने वाला कर्मफलदाता मानती है, जो हमारे अपने कर्मों का फल लौटाते हैं। यह आरती स्तुति और शरण का गीत है, और परिवार इसे बाकी आरतियों की तरह ही गाते हैं।

आरती में कितना समय लगता है?

हर पद के बाद टेक गाते हुए लगभग तीन मिनट।

स्रोत और समीक्षा

स्रोत: Traditional Hindi aarti as given by BhaktiBharat.com (aarti/shri-shani-dev-ji) and Bharat Discovery / Bharatkosh (शनिदेव जी की आरती), cross-checked with the copy printed after the Shani Chalisa on sanskritdocuments.org (doc_z_otherlang_hindi/shani40)

BhaktiBharat and Bharat Discovery agree word for word, and we follow them. sanskritdocuments.org differs only in spelling: "प्रभू" (refrain), "किरिट" for "क्रीट" (stanza 2) and "ऋषी मुनी" (stanza 4). We print the refrain in full once; in homes it is repeated after every stanza.

मूल पाठ को यहाँ बताए गए स्रोतों से पंक्ति-दर-पंक्ति मिलाया गया है। अर्थ AI की मदद से लिखा गया मसौदा हैं। अभी किसी विद्वान ने इनकी जाँच नहीं की है।

ये अर्थ हमारा पहला मसौदा हैं। अभी किसी विद्वान ने इनकी जाँच नहीं की है। कोई भूल दिखे तो हमें ज़रूर बताएँ।

त्रुटि बताएँ अंतिम अद्यतन 2026-10-04

मुख्य तथ्य

रचयिता
पारंपरिक
श्लोक / पद
5
मूल भाषा
हिन्दी
स्रोत संस्करण
Traditional Hindi aarti as given by BhaktiBharat.com (aarti/shri-shani-dev-ji) and Bharat Discovery / Bharatkosh (शनिदेव जी की आरती), cross-checked with the copy printed after the Shani Chalisa on sanskritdocuments.org (doc_z_otherlang_hindi/shani40)
आख़िरी जाँच
समीक्षा की स्थिति
लिपि सत्यापित

इस पन्ने का संदर्भ दें

“श्री शनिदेव जी की आरती”. Nitya, अद्यतन 2026-10-04. https://getnitya.com/hi/shani/shani-aarti/

निर्देशित गति

अभी रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं है। निर्देशित गति हर पंक्ति को चमकाती है, ताकि आप साथ-साथ पाठ कर सकें।

प्रति पंक्ति 10 सेकंड

पढ़ने की सेटिंग

पाठ का तरीका

लिपि

जो लिपि आप पढ़ते हैं, उसी में पाठ करें। आपकी पसंद इसी डिवाइस पर याद रहती है।

प्रदर्शन

अक्षर का आकार 22px

शब्दार्थ

भावार्थ

इस पद का महत्व

यह पद अलग पन्ने पर खोलें इस पद में त्रुटि बताएँ

और विकल्पों के लिए किसी भी पद को दबाकर रखें (या उसके कमल बटन पर Shift+F10 दबाएँ)।

जाप गणक

एक मनका गिनने के लिए छुएँ। दबाकर रखें तो गिनती एक-एक मनका आगे बढ़ती रहेगी।

आज
0
कुल
0

घंटी बजाने के लिए कहीं भी छुएँ।