Nityaनित्य
शान्ताकारं भुजगशयनं
Shantakaram Bhujagashayanam
शान्ताकारं भुजगशयनं भगवान विष्णु के सबसे प्रसिद्ध ध्यान श्लोकों में से एक है। यह संस्कृत का एक ही श्लोक है, जिसे विष्णु सहस्रनाम से पहले और रोज़ की पूजा में पढ़ा जाता है। इसमें शेषनाग पर शांत भाव से लेटे विष्णु का ध्यान है, और उन्हें संसार का भय हरने वाला मानकर प्रणाम किया गया है। बहुत से परिवार इसे रोज़ सुबह, और ख़ासकर गुरुवार व एकादशी को पढ़ते हैं।
मंत्र
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
जिनका स्वरूप शांत है, जो शेषनाग की शय्या पर शयन करते हैं, जिनकी नाभि से कमल निकला है, जो देवताओं के स्वामी हैं; जो विश्व के आधार हैं, आकाश के समान व्यापक हैं, मेघ के समान श्याम हैं और जिनके सभी अंग मंगलमय हैं; जो लक्ष्मी जी के प्रिय हैं, कमल-नयन हैं और योगियों को ध्यान में प्राप्त होते हैं, संसार के भय को हरने वाले, सब लोकों के एकमात्र स्वामी उन भगवान विष्णु को मैं प्रणाम करता हूँ।