दुर्गा माँ — एक पारंपरिक भक्ति चित्र
दुर्गा माँ · Kalighat painting, Durga riding on her lion, 19th century. Wellcome Collection. Public Domain Mark.

दुर्गा माँ

దుర్గాదేవిதுர்கை அம்மன்Durga Maa

अन्य नाम: Ambe Maa · Amba · Jagdamba · Sherawali · Mahishasura Mardini · Bhavani · Chandi · Gauri · Navadurga · Kanaka Durga

दुर्गा माँ सिंह पर सवार जगदम्बा हैं, जिन्होंने महिषासुर का वध किया था। भक्त रक्षा के लिए हर मंगलवार और शुक्रवार उनकी पूजा करते हैं, और सबसे बढ़कर नवरात्रि की नौ रातों में, जब उनके नौ रूपों की उपासना होती है।

पूजा का दिन
मंगलवार · शुक्रवार

दुर्गा माँ के पाठ

कथा

देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती) में कथा है कि महिषासुर को ऐसा वरदान मिला था कि वह लगभग अजेय हो गया, और उसने देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया। देवता क्रोध से भर उठे। तब ब्रह्मा, विष्णु, शिव और सभी देवताओं के शरीर से एक बड़ा तेज निकला और वही तेज मिलकर देवी बन गया। हर देवता ने माँ को अपना अस्त्र दिया। शिव जी ने त्रिशूल, विष्णु जी ने चक्र और इंद्र ने वज्र दिया। हिमालय ने सवारी के लिए सिंह दिया।

'दुर्गा' का अर्थ है जिन तक पहुँचना कठिन हो। महिषासुर बार-बार रूप बदलता रहा, कभी भैंसा, कभी सिंह, कभी हाथी, पर अंत में माँ ने उसका वध कर दिया। लोक परंपरा कहती है कि यह युद्ध नौ दिन चला और दसवें दिन माँ की जीत हुई। दूसरे युद्धों में माँ ने शुम्भ-निशुम्भ, चण्ड-मुण्ड और रक्तबीज का संहार किया। रक्तबीज के खून की हर बूँद से एक नया दैत्य पैदा हो जाता था। बहुत से भक्त इन कथाओं को अपने भीतर के अहंकार पर माँ की जीत के रूप में भी देखते हैं।

माँ का पर्व नवरात्रि है, जो साल में दो बार आता है, चैत्र में और शारदीय (आश्विन) में। हर रात उनके एक रूप की पूजा होती है, शैलपुत्री से लेकर सिद्धिदात्री तक। शारदीय नवरात्रि के बाद विजयादशमी (दशहरा) आती है। बंगाल में, और जहाँ भी बंगाली परिवार रहते हैं, दुर्गा पूजा को माँ के अपने बच्चों के साथ मायके आने का उत्सव माना जाता है। नवरात्रि की शाम को बहुत से घरों में जय अम्बे गौरी आरती गाई जाती है।

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