लक्ष्मी माता
లక్ష్మీదేవిலட்சுமி தேவிLakshmi Mata
अन्य नाम: Mahalakshmi · Laxmi · Shri · Kamala · Padma · Rama · Narayani · Vaibhav Lakshmi · Varalakshmi · Ashtalakshmi
लक्ष्मी माता धन और समृद्धि की देवी हैं और भगवान विष्णु की पत्नी हैं। भक्त घर में सुख-समृद्धि के लिए शुक्रवार को, और सबसे बढ़कर दीपावली की रात, उनकी पूजा करते हैं।
- पूजा का दिन
- शुक्रवार
- त्योहार
- दीपावली (लक्ष्मी पूजा) · धनतेरस · वरलक्ष्मी व्रत
लक्ष्मी माता के पाठ
स्तोत्र २
- श्रीसूक्तम् 6 मिनट श्रीसूक्त देवी लक्ष्मी की सबसे प्राचीन स्तुति है: ऋग्वेद के खिल (परिशिष्ट) सूक्तों में आने वाले पंद्रह मंत्र। इसमें अग्निदेव से विनती है कि वे स्वर्णमयी, कभी न जाने वाली लक्ष्मी को घर में लाएँ और दरिद्रता को दूर करें। सोलहवाँ श्लोक, जो यहाँ दिया गया है, इन पंद्रह मंत्रों के नित्य जप की विधि बताता है; लक्ष्मी पूजन, शुक्रवार और दीपावली की रात इसका पाठ होता है। 16 पद · वैदिक (ऋग्वेद खिल); परंपरा में ऋषि आनंद, कर्दम, चिक्लीत और श्रीद बताए जाते हैं
- कनकधारा स्तोत्रम् 8 मिनट कनकधारा स्तोत्रम् देवी लक्ष्मी की संस्कृत स्तुति है, जिसे परंपरा आदि शंकराचार्य की रचना मानती है। इसके १८ श्लोकों में लक्ष्मी जी के करुणामय कटाक्ष की याचना है, और अंतिम श्लोक कहता है कि नित्य पाठ करने वाला कुबेर के समान हो जाता है। परंपरा के अनुसार बालक शंकर ने जब एक निर्धन स्त्री के लिए इसे गाया, तो लक्ष्मी जी ने उसके घर सोने के आँवले बरसाए; शुक्रवार, अक्षय तृतीया और दीपावली पर इसका पाठ होता है। 19 पद · आदि शंकराचार्य (परंपरा के अनुसार)
कथा
पुराणों में कथा है कि देवताओं और असुरों ने अमृत के लिए क्षीरसागर का मंथन किया, तो समुद्र से कई रत्न निकले। उन्हीं के साथ लक्ष्मी जी प्रकट हुईं, खिले हुए कमल पर बैठी और हाथों में कमल लिए। उन्होंने भगवान विष्णु को चुना, उन्हें वरमाला पहनाई और उनके वक्षस्थल पर सदा के लिए वास किया।
परंपरा में लक्ष्मी जी के आठ रूप बताए जाते हैं, जिन्हें अष्टलक्ष्मी कहते हैं। ये धान्य, धैर्य, संतान, विजय, विद्या जैसे अलग-अलग वरदान देती हैं। चित्रों में दो हाथी उन पर जल डालते दिखते हैं और उनके हाथ से सोने के सिक्के गिरते हैं। कई जगह उल्लू को उनका वाहन माना जाता है।
घरों में माना जाता है कि लक्ष्मी जी वहीं टिकती हैं जहाँ सफ़ाई हो और लोग ईमानदारी से मेहनत करें। जहाँ कलह और फ़िज़ूलख़र्ची हो, वहाँ से वे चली जाती हैं। इसीलिए दीपावली से पहले पूरे घर की सफ़ाई होती है और हर कोने में दीये जलते हैं। बहुत से परिवार रोज़ शाम देहरी पर दीया जलाते हैं। दीपावली की रात गणेश जी के साथ लक्ष्मी पूजन होता है और ॐ जय लक्ष्मी माता आरती गाई जाती है।