गणेश
వినాయకుడుவிநாயகர்Ganesh
अन्य नाम: Ganesha · Ganpati · Vinayaka · Vighnaharta · Gajanan · Ekadanta · Lambodara · Vakratunda · Pillaiyar · Siddhivinayak
गणेश जी भगवान शिव और माता पार्वती के गजमुख पुत्र हैं, जिन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है। कोई भी पूजा या नया काम शुरू करने से पहले उनकी पूजा होती है, और बुधवार व गणेश चतुर्थी पर उन्हें मोदक और दूर्वा चढ़ाई जाती है।
- पूजा का दिन
- बुधवार
- त्योहार
- गणेश चतुर्थी
गणेश के पाठ
कथा
पुराणों में कथा है कि माता पार्वती ने अपने उबटन से एक बालक बनाया और उसे द्वार पर पहरा देने को कहा। भगवान शिव लौटे तो बालक ने उन्हें पहचाना नहीं और भीतर जाने से रोक दिया। दोनों में युद्ध हुआ और बालक का सिर कट गया। पार्वती जी का दुख देखकर शिव जी ने उसे हाथी का सिर लगाकर फिर से जीवित किया। उन्होंने उसे अपने गणों का नायक, गणपति, बनाया और वरदान दिया कि सब देवताओं से पहले उसी की पूजा होगी।
भक्त उनके रूप के हर अंग में अर्थ देखते हैं। बड़ा सिर बुद्धि का और बड़े कान ध्यान से सुनने का प्रतीक माने जाते हैं। सूँड टेढ़ी है, इसलिए वे वक्रतुंड कहलाते हैं। एक ही दाँत है, इसलिए एकदंत। परंपरा कहती है कि व्यास जी महाभारत बोलते गए और गणेश जी ने अपना एक दाँत तोड़कर उसी से लिखा। उनका वाहन छोटा-सा मूषक है।
इसीलिए पूजा हो, शादी हो, गृहप्रवेश हो या नया कारोबार, शुरुआत "श्री गणेशाय नमः" और "वक्रतुण्ड महाकाय" श्लोक से होती है। उन्हें मोदक, लड्डू, लाल फूल और दूर्वा चढ़ाई जाती है, अक्सर इक्कीस-इक्कीस की गिनती में।
भाद्रपद की गणेश चतुर्थी उनका सबसे बड़ा त्योहार है। लोग मिट्टी की मूर्ति घर लाते हैं और हर शाम "जय गणेश देवा" और "सुखकर्ता दुःखहर्ता" गाते हैं। डेढ़ दिन से लेकर दस दिन बाद "गणपति बप्पा मोरया!" के जयकारे के साथ उनका विसर्जन होता है। विदेश में बहुत से परिवार घर पर ही बाल्टी या टब में विसर्जन कर लेते हैं।