सरस्वती माता — एक पारंपरिक भक्ति चित्र
सरस्वती माता · Raja Ravi Varma, Saraswati, chromolithograph. Wellcome Collection. Public Domain Mark.

सरस्वती माता

సరస్వతీదేవిசரஸ்வதி தேவிSaraswati Mata

अन्य नाम: Sharada · Vagdevi · Vani · Bharati · Veenapani · Veena Vadini · Hamsavahini · Vidya Devi · Maa Sharde · Kalaimagal

सरस्वती माता विद्या, वाणी और संगीत की देवी हैं, जिन्हें सफ़ेद वस्त्रों में, सफ़ेद कमल पर वीणा बजाते दिखाया जाता है। विद्यार्थी पढ़ाई और परीक्षा से पहले उन्हें याद करते हैं, और उनका मुख्य पर्व बसंत पंचमी है।

त्योहार
बसंत पंचमी

सरस्वती माता के पाठ

कथा

ऋग्वेद में सरस्वती एक बड़ी, जीवन देने वाली नदी हैं, और उन्हें अच्छी वाणी की प्रेरणा देने वाली देवी भी कहा गया है। समय के साथ नदी की यही देवी विद्या और संगीत की देवी के रूप में पूजी जाने लगीं। पुराणों में वे सृष्टि रचने वाले ब्रह्मा जी की शक्ति हैं, और लक्ष्मी जी व पार्वती जी के साथ तीन महादेवियों में गिनी जाती हैं।

उन्हें सफ़ेद वस्त्रों में, सफ़ेद कमल पर दिखाया जाता है। उनके हाथों में वीणा, पुस्तक और माला होती है, और पास में हंस। कहते हैं कि हंस दूध और पानी को अलग कर देता है, इसलिए वह विवेक का प्रतीक है, यानी सही और ग़लत को पहचानने की समझ।

माघ शुक्ल पंचमी, यानी बसंत पंचमी, उनका पर्व है। इस दिन लोग पीले कपड़े पहनते हैं, माँ के सामने किताबें और वाद्य रखते हैं, और बहुत से बच्चे इसी दिन पहला अक्षर लिखते हैं। दक्षिण भारत में नवरात्रि में सरस्वती पूजा होती है, जब किताबें और औज़ार माँ के आगे रख दिए जाते हैं। बहुत से विद्यार्थी पढ़ने से पहले 'या कुन्देन्दुतुषारहारधवला' प्रार्थना बोलते हैं।

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