शिव — एक पारंपरिक भक्ति चित्र
शिव · Chromolithograph, Shri Shankara Shiva, Pune, c. 1890–1920. The Metropolitan Museum of Art, 2021.219. CC0 (Open Access).

शिव

శివుడుசிவன்Shiva

अन्य नाम: Mahadev · Bholenath · Shankar · Mahesh · Rudra · Neelkanth · Shambhu · Sadashiva · Vishwanath · Nataraja

भगवान शिव महादेव हैं, जिनकी पूजा शिवलिंग के रूप में और कैलास पर बैठे भस्म रमाए योगी के रूप में होती है। वे भोलेनाथ हैं, जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं, और भक्त सोमवार को, सावन के महीने में और महाशिवरात्रि की रात उनकी विशेष पूजा करते हैं।

पूजा का दिन
सोमवार
त्योहार
महाशिवरात्रि

शिव के पाठ

स्तोत्र २

  1. शिव तांडव स्तोत्रम् 7 मिनट शिव तांडव स्तोत्रम् भगवान शिव के प्रचंड तांडव नृत्य का वर्णन करने वाला संस्कृत स्तोत्र है। परंपरा इसकी रचना लंकापति रावण की मानती है। इसमें १५ श्लोक और उनके बाद २ फलश्रुति श्लोक हैं, जिनकी तेज़ लय शिव के डमरू की थाप जैसी लगती है। परंपरा के अनुसार सोमवार और प्रदोष काल में इसका पाठ विशेष फलदायी है। 17 पद · लंकापति रावण द्वारा रचित माना जाता है
  2. शिव पञ्चाक्षर स्तोत्रम् 3 मिनट शिव पञ्चाक्षर स्तोत्रम् पाँच श्लोकों का संस्कृत स्तोत्र है, जिसे परंपरा आदि शंकराचार्य की रचना मानती है। यह "न-मः शि-वा-य" मंत्र के पाँच अक्षरों पर आधारित है। हर श्लोक शिव की स्तुति करके उन्हें क्रम से न, म, शि, व और य अक्षर रूप में नमस्कार करता है। अंत की फलश्रुति कहती है कि इसके पाठ से शिवलोक मिलता है। इसे अभिषेक के समय, सोमवार और महाशिवरात्रि पर गाया जाता है। 6 पद · आदि शंकराचार्य (परंपरा के अनुसार)

कथा

वेदों में वे रुद्र हैं, जो उग्र भी हैं और रोग हरने वाले भी। महामृत्युंजय मंत्र उन्हें त्र्यम्बक, यानी तीन नेत्रों वाला, कहता है। समय के साथ रुद्र को शिव कहा जाने लगा, जिसका अर्थ है कल्याण करने वाला। भक्तों के लिए वही परमेश्वर हैं। वे ध्यान में बैठे महायोगी भी हैं और तांडव करने वाले नटराज भी।

पुराणों में कथा है कि देवताओं और असुरों ने क्षीरसागर का मंथन किया तो सबसे पहले हलाहल विष निकला, जो सारे लोकों को जला सकता था। सृष्टि को बचाने के लिए शिव जी ने वह विष पी लिया। माता पार्वती ने उसे उनके गले में ही रोक दिया और गला नीला पड़ गया। इसीलिए वे नीलकंठ कहलाते हैं। बहुत से लोग कहते हैं कि इसीलिए शिवलिंग पर ठंडा जल और दूध चढ़ाया जाता है।

उनकी जटाओं में चंद्रमा और गंगा हैं, गले में नाग हैं और शरीर पर भस्म। अर्धनारीश्वर रूप में आधा अंग शिव का है और आधा माता पार्वती का। गणेश जी और कार्तिकेय उनके पुत्र हैं। हर शिव मंदिर में नंदी महाराज उनकी ओर मुँह किए बैठे रहते हैं।

उन्हें भोलेनाथ इसलिए कहते हैं कि वे बहुत थोड़े में मान जाते हैं। एक बेलपत्र, एक लोटा जल और सच्चे मन से "ॐ नमः शिवाय" काफ़ी है। हिमालय के केदारनाथ से लेकर दक्षिण के रामेश्वरम तक उनके बारह ज्योतिर्लिंग हैं, और काशी में वे विश्वनाथ के रूप में विराजते हैं। भक्त इन तीर्थों की यात्रा करते हैं।

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