43 में से पद 28
श्री हनुमान चालीसा: चौपाई २६
संकट तें हनुमान छुड़ावै। Sankat Ten Hanuman Chhudavai
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥ Man Kram Bachan Dhyan Jo Lavai
भावार्थ
जो मन, कर्म और वचन से हनुमान जी का ध्यान करता है, उसे हनुमान जी सब संकटों से छुड़ा देते हैं।
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| संकट Sankat | संकट |
| तें Ten | से |
| हनुमान Hanuman | हनुमान जी |
| छुड़ावै Chhudavai | छुड़ाते हैं |
| मन Man | मन |
| क्रम Kram | कर्म |
| बचन Bachan | वचन |
| ध्यान Dhyan | ध्यान |
| जो Jo | जो |
| लावै Lavai | लगाता है |
इस पद का महत्व
अनेक प्रचलित संस्करणों में 'संकट से' पाठ है; गीता प्रेस में अवधी रूप 'संकट तें' है। अर्थ एक ही है।
यह पद दूसरी लिपियों में पढ़ें
- IAST (scholarly)
- saṃkaṭa teṃ hanumāna chuṛāvai|mana krama bacana dhyāna jo lāvai||
- Telugu
- సంకట్ తేం హనుమాన్ ఛుడావై।మన్ క్రమ్ బచన్ ధ్యాన్ జో లావై॥
- Tamil
- ஸங்கட் தேம் ஹநுமாந் சு²டா³வை।மந் க்ரம் ப³சந் த்⁴யாந் ஜோ லாவை॥
- Kannada
- ಸಂಕಟ್ ತೇಂ ಹನುಮಾನ್ ಛುಡಾವೈ।ಮನ್ ಕ್ರಮ್ ಬಚನ್ ಧ್ಯಾನ್ ಜೋ ಲಾವೈ॥
- Malayalam
- സംകട് തേം ഹനുമാന് ഛുഡാവൈ।മന് ക്രമ് ബചന് ധ്യാന് ജോ ലാവൈ॥
- Gujarati
- સંકટ્ તેં હનુમાન્ છુડાવૈ।મન્ ક્રમ્ બચન્ ધ્યાન્ જો લાવૈ॥
- Bengali
- সংকট্ তেং হনুমান্ ছুডাবৈ।মন্ ক্রম্ বচন্ ধ্যান্ জো লাবৈ॥