श्री हनुमान चालीसा

Hanuman Chalisa

हनुमान चालीसा भगवान हनुमान की स्तुति है, जिसे १६वीं शताब्दी के संत-कवि गोस्वामी तुलसीदास ने अवधी में लिखा। इसके ४३ पदों (आरंभ के दो दोहे, ४० चौपाइयाँ और अंत का एक दोहा) में हनुमान जी का गुणगान है और श्रीराम के लिए किए उनके कामों की कथा है। बहुत से भक्त इसका पाठ रोज़ करते हैं, ख़ासकर मंगलवार और शनिवार को।

  • 43 पद
  • 8 मिनट
  • गोस्वामी तुलसीदास
  • उत्तम दिन: मंगलवार, शनिवार

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श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि।Shri Guru Charan Saroj Raj, Nij Manu Mukuru Sudhari

बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥Baranau Raghubar Bimal Jasu, Jo Dayaku Phal Chari

श्री गुरुदेव के चरणकमलों की धूल से अपने मन रूपी दर्पण को निर्मल करके मैं रघुकुल श्रेष्ठ श्रीराम के उस पवित्र यश का वर्णन करता हूँ, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, चारों फल देने वाला है।

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।Buddhiheen Tanu Janike, Sumirau Pavan Kumar

बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥Bal Buddhi Bidya Dehu Mohi, Harahu Kalesh Bikar

स्वयं को बुद्धिहीन जानकर मैं पवनपुत्र हनुमान जी का स्मरण करता हूँ। हे प्रभु, मुझे बल, बुद्धि और विद्या दीजिए और मेरे सब क्लेश तथा विकार दूर कीजिए।

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।Jai Hanuman Gyan Gun Sagar

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥Jai Kapis Tihun Lok Ujagar

हे हनुमान जी, आपकी जय हो! आप ज्ञान और गुणों के सागर हैं। हे कपीश्वर, आपकी जय हो! आपकी कीर्ति तीनों लोकों में प्रकाशित है।

राम दूत अतुलित बल धामा।Ram Doot Atulit Bal Dhama

अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥Anjani Putra Pavan Sut Nama

आप श्रीराम के दूत और अतुलनीय बल के भंडार हैं। आप अंजनीपुत्र और पवनसुत के नाम से प्रसिद्ध हैं।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।Mahabir Bikram Bajrangi

कुमति निवार सुमति के संगी॥Kumati Nivar Sumati Ke Sangi

आप महान वीर, पराक्रमी और वज्र के समान अंगों वाले (बजरंगी) हैं। आप दुर्बुद्धि को दूर करते हैं और सद्बुद्धि के साथी हैं।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।Kanchan Baran Biraj Subesa

कानन कुंडल कुंचित केसा॥Kanan Kundal Kunchit Kesa

आपका वर्ण स्वर्ण के समान है और आप सुंदर वेश में सुशोभित हैं। आपके कानों में कुंडल हैं और केश घुँघराले हैं।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।Hath Bajra Au Dhvaja Birajai

काँधे मूँज जनेऊ साजै॥Kandhe Moonj Janeu Sajai

आपके हाथों में वज्र और ध्वजा सुशोभित हैं और कंधे पर मूँज का जनेऊ शोभा देता है।

संकर सुवन केसरीनंदन।Sankar Suvan Kesari Nandan

तेज प्रताप महा जग बंदन॥Tej Pratap Maha Jag Bandan

आप भगवान शंकर के अंश और केसरी के नंदन हैं। आपका तेज और प्रताप महान है; सारा संसार आपकी वंदना करता है।

विद्यावान गुनी अति चातुर।Vidyavan Guni Ati Chatur

राम काज करिबे को आतुर॥Ram Kaj Karibe Ko Atur

आप विद्वान, गुणवान और अत्यंत चतुर हैं तथा श्रीराम के कार्य करने के लिए सदा आतुर रहते हैं।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।Prabhu Charitra Sunibe Ko Rasiya

राम लखन सीता मन बसिया॥Ram Lakhan Sita Man Basiya

आप प्रभु श्रीराम की कथा सुनने के रसिक हैं। श्रीराम, लक्ष्मण और सीता जी आपके हृदय में बसते हैं।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।Sukshma Roop Dhari Siyahi Dikhava

बिकट रूप धरि लंक जरावा॥Bikat Roop Dhari Lank Jarava

आपने सूक्ष्म रूप धारण करके सीता जी को दर्शन दिए और विकराल रूप धारण करके लंका को जला दिया।

भीम रूप धरि असुर सँहारे।Bhim Roop Dhari Asur Sanhare

रामचंद्र के काज सँवारे॥Ramchandra Ke Kaj Sanvare

आपने भयंकर रूप धारण करके असुरों का संहार किया और श्री रामचंद्र जी के कार्यों को सफल बनाया।

लाय सजीवन लखन जियाये।Laye Sajivan Lakhan Jiyaye

श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥Shri Raghubir Harashi Ur Laye

आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी को जीवित किया, जिससे श्री रघुवीर ने प्रसन्न होकर आपको हृदय से लगा लिया।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।Raghupati Kinhi Bahut Badai

तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥Tum Mam Priya Bharatahi Sam Bhai

रघुपति श्रीराम ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा, 'तुम मुझे भरत के समान प्रिय भाई हो।'

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।Sahas Badan Tumharo Jas Gavain

अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥As Kahi Shripati Kanth Lagavain

'हज़ार मुखों वाले शेषनाग भी तुम्हारा यश गाते हैं', ऐसा कहकर लक्ष्मीपति श्रीराम ने आपको गले से लगा लिया।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।Sanakadik Brahmadi Munisa

नारद सारद सहित अहीसा॥Narad Sarad Sahit Ahisa

सनक आदि ऋषि, ब्रह्मा आदि देवता, बड़े-बड़े मुनि, नारद, सरस्वती और शेषनाग भी…

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते।Jam Kuber Digpal Jahan Te

कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥Kabi Kobid Kahi Sake Kahan Te

यमराज, कुबेर और दिशाओं के रक्षक दिक्पाल भी जब आपका यश पूरा नहीं कह पाते, तो कवि और विद्वान उसे कैसे कह सकते हैं?

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।Tum Upkar Sugrivahi Kinha

राम मिलाय राज पद दीन्हा॥Ram Milaye Raj Pad Dinha

आपने सुग्रीव पर बड़ा उपकार किया। उन्हें श्रीराम से मिलाकर राजपद दिलाया।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।Tumharo Mantra Bibhishan Mana

लंकेस्वर भए सब जग जाना॥Lankeshwar Bhaye Sab Jag Jana

विभीषण ने आपकी सलाह मानी और वे लंका के राजा बने, यह सारा संसार जानता है।

जुग सहस्र जोजन पर भानू।Jug Sahasra Jojan Par Bhanu

लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥Leelyo Tahi Madhur Phal Janu

हज़ारों योजन दूर स्थित सूर्य को आपने मीठा फल समझकर निगल लिया।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।Prabhu Mudrika Meli Mukh Mahi

जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥Jaladhi Langhi Gaye Acharaj Nahi

प्रभु श्रीराम की अँगूठी मुख में रखकर आपने समुद्र लाँघ लिया। इसमें कोई आश्चर्य नहीं।

दुर्गम काज जगत के जेते।Durgam Kaj Jagat Ke Jete

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥Sugam Anugrah Tumhare Tete

संसार के जितने भी कठिन कार्य हैं, वे सब आपकी कृपा से सरल हो जाते हैं।

राम दुआरे तुम रखवारे।Ram Duare Tum Rakhvare

होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥Hot Na Agya Binu Paisare

आप श्रीराम के द्वार के रखवाले हैं; आपकी आज्ञा के बिना वहाँ कोई प्रवेश नहीं कर सकता।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।Sab Sukh Lahai Tumhari Sarna

तुम रच्छक काहू को डर ना॥Tum Rakshak Kahu Ko Dar Na

आपकी शरण में आने वाला सब सुख पाता है। जब आप रक्षक हैं, तो किसी का डर नहीं रहता।

आपन तेज सम्हारो आपै।Aapan Tej Samharo Aapai

तीनों लोक हाँक तें काँपै॥Teenon Lok Hank Te Kanpai

अपने तेज को आप ही सँभाल सकते हैं; आपकी एक हुंकार से तीनों लोक काँप उठते हैं।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।Bhoot Pisach Nikat Nahi Aavai

महाबीर जब नाम सुनावै॥Mahabir Jab Naam Sunavai

जहाँ महावीर हनुमान जी का नाम लिया जाता है, वहाँ भूत-पिशाच पास नहीं आते।

नासै रोग हरै सब पीरा।Nasai Rog Harai Sab Peera

जपत निरंतर हनुमत बीरा॥Japat Nirantar Hanumat Beera

वीर हनुमान जी का निरंतर जप करने से रोग नष्ट होते हैं और सारी पीड़ा दूर हो जाती है।

संकट तें हनुमान छुड़ावै।Sankat Ten Hanuman Chhudavai

मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥Man Kram Bachan Dhyan Jo Lavai

जो मन, कर्म और वचन से हनुमान जी का ध्यान करता है, उसे हनुमान जी सब संकटों से छुड़ा देते हैं।

सब पर राम तपस्वी राजा।Sab Par Ram Tapasvi Raja

तिन के काज सकल तुम साजा॥Tin Ke Kaj Sakal Tum Saja

तपस्वी राजा श्रीराम सबसे श्रेष्ठ हैं, और उनके सब कार्य आपने ही सँवारे।

और मनोरथ जो कोइ लावै।Aur Manorath Jo Koi Lavai

सोइ अमित जीवन फल पावै॥Soi Amit Jivan Phal Pavai

जो कोई भी अपनी कोई मनोकामना लेकर आपके पास आता है, वह जीवन का असीम फल प्राप्त करता है।

चारों जुग परताप तुम्हारा।Charon Jug Partap Tumhara

है परसिद्ध जगत उजियारा॥Hai Parsiddh Jagat Ujiyara

चारों युगों में आपका प्रताप है; आपकी कीर्ति सारे संसार में प्रसिद्ध है और जगत को उजियारा देती है।

साधु संत के तुम रखवारे।Sadhu Sant Ke Tum Rakhvare

असुर निकंदन राम दुलारे॥Asur Nikandan Ram Dulare

आप साधु-संतों के रक्षक, असुरों का नाश करने वाले और श्रीराम के दुलारे हैं।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।Ashta Siddhi Nau Nidhi Ke Data

अस बर दीन जानकी माता॥As Bar Din Janaki Mata

माता जानकी ने आपको ऐसा वर दिया है कि आप आठों सिद्धियाँ और नौ निधियाँ देने वाले हैं।

राम रसायन तुम्हरे पासा।Ram Rasayan Tumhare Pasa

सदा रहो रघुपति के दासा॥Sada Raho Raghupati Ke Dasa

आपके पास राम-भक्ति रूपी रसायन है; आप सदा रघुपति श्रीराम के दास बने रहते हैं।

तुम्हरे भजन राम को पावै।Tumhare Bhajan Ram Ko Pavai

जनम जनम के दुख बिसरावै॥Janam Janam Ke Dukh Bisravai

आपके भजन से मनुष्य श्रीराम को पाता है और जन्म-जन्मांतर के दुखों को भूल जाता है।

अंत काल रघुबर पुर जाई।Ant Kal Raghubar Pur Jai

जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥Jahan Janma Haribhakt Kahai

अंत समय में वह श्री रघुनाथ जी के धाम जाता है, और जहाँ भी जन्म लेता है, हरिभक्त कहलाता है।

और देवता चित्त न धरई।Aur Devta Chitt Na Dharai

हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥Hanumat Sei Sarb Sukh Karai

किसी अन्य देवता को मन में धारण न करके भी, केवल हनुमान जी की सेवा से सब सुख प्राप्त होते हैं।

संकट कटै मिटै सब पीरा।Sankat Katai Mitai Sab Peera

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥Jo Sumirai Hanumat Balbeera

जो बलवीर हनुमान जी का स्मरण करता है, उसके संकट कट जाते हैं और सब पीड़ा मिट जाती है।

जै जै जै हनुमान गोसाईं।Jai Jai Jai Hanuman Gosain

कृपा करहु गुरु देव की नाईं॥Kripa Karahu Guru Dev Ki Nain

हे स्वामी हनुमान जी, आपकी जय हो, जय हो, जय हो! आप गुरुदेव की भाँति मुझ पर कृपा कीजिए।

जो सत बार पाठ कर कोई।Jo Sat Bar Path Kar Koi

छूटहि बंदि महा सुख होई॥Chhutahi Bandi Maha Sukh Hoi

जो कोई इसका सौ बार पाठ करता है, वह बंधनों से छूट जाता है और उसे महान सुख मिलता है।

जो यह पढ़ै हनुमान चलीसा।Jo Yah Padhai Hanuman Chalisa

होय सिद्धि साखी गौरीसा॥Hoy Siddhi Sakhi Gaurisa

जो इस हनुमान चालीसा का पाठ करता है, उसे सिद्धि प्राप्त होती है। इसके साक्षी स्वयं गौरीपति भगवान शिव हैं।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।Tulsidas Sada Hari Chera

कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥Kijai Nath Hriday Mah Dera

तुलसीदास सदा श्रीहरि के सेवक हैं। हे नाथ, आप मेरे हृदय में निवास कीजिए।

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।Pavan Tanay Sankat Haran, Mangal Murati Roop

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥Ram Lakhan Sita Sahit, Hriday Basahu Sur Bhoop

हे पवनपुत्र, संकटों को हरने वाले, मंगल की मूर्ति! हे देवताओं के राजा, आप श्रीराम, लक्ष्मण और सीता जी सहित मेरे हृदय में निवास कीजिए।

पूर्ण

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प्रश्न

हनुमान चालीसा किसने और कब लिखी?

गोस्वामी तुलसीदास ने, जो १६वीं शताब्दी के संत-कवि थे और जिन्होंने श्रीरामचरितमानस भी लिखा। यह अवधी में है, और चालीसवीं चौपाई में तुलसीदास जी ने अपना नाम दिया है। एक प्रचलित कथा के अनुसार उन्होंने इसे मुग़ल दरबार में बंदी रहते हुए रचा, पर इसकी ऐतिहासिक पुष्टि नहीं होती।

हनुमान चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?

रोज़ एक बार, मन लगाकर, यही आम परंपरा है। बहुत से भक्त, ख़ासकर मंगलवार और शनिवार को, ३, ७ या ११ बार पाठ करते हैं, और किसी विशेष संकल्प के लिए १०८ पाठ भी करते हैं। चालीसा में ख़ुद (चौपाई ३८) सौ बार पाठ की बात है। उतनी संख्या चुनें जो आप नियम से निभा सकें; परंपरा में संख्या से ज़्यादा श्रद्धा का महत्व है।

हनुमान चालीसा पढ़ने का सबसे अच्छा दिन और समय कौन सा है?

मंगलवार और शनिवार हनुमान जी के परंपरागत दिन हैं, और हनुमान जयंती ख़ास है। सुबह नहाने के बाद और शाम को दीया जलाते समय पाठ करना अच्छा माना जाता है। पर कोई कड़ा नियम नहीं है। विदेश में बसे कई परिवार स्कूल से पहले, रास्ते में या सोने से पहले पाठ करते हैं।

क्या महिलाएँ हनुमान चालीसा पढ़ सकती हैं?

हाँ। घरों और मंदिरों में महिलाएँ रोज़ इसका पाठ करती हैं, और इसके अंतिम पदों में 'जो यह पढ़ै' कहकर हर पढ़ने वाले को फल बताया गया है। कुछ परिवार अपनी रीतियाँ मानते हैं, जैसे मासिक धर्म के दिनों में, तो अपने घर की परंपरा के अनुसार चलें।

'भूत पिसाच निकट नहिं आवै' का क्या अर्थ है?

चौबीसवीं चौपाई कहती है कि जहाँ महावीर का नाम लिया जाता है, वहाँ भूत-पिशाच पास नहीं आते। परंपरा इसे बाहरी और भीतरी दोनों अर्थों में लेती है: हनुमान जी का नाम डर और घबराहट को भी दूर करता है। इसीलिए बहुत से लोग डर लगने पर यह पंक्ति मन में दोहराते हैं।

क्या चालीसा पढ़ने के लिए अवधी समझना ज़रूरी है?

नहीं। ज़्यादातर लोग हर शब्द का अर्थ जानने से बरसों पहले से इसका पाठ करते आ रहे होते हैं। साथ-साथ हर पद का अर्थ पढ़ने से भाव मन में और अच्छी तरह उतरता है।

हनुमान चालीसा के पाठ में कितना समय लगता है?

सधी हुई गति से लगभग ८ मिनट।

स्रोत और समीक्षा

स्रोत: Shri Hanuman Chalisa, Gita Press Gorakhpur reading (as printed in the appendix to Gita Press's Shri Ramcharitmanas; scanned copy on archive.org), cross-checked line by line with sanskritdocuments.org (doc_z_otherlang_hindi/chaalisa) and vignanam.org

We follow the Gita Press text wherever editions differ: 'Sankar suvan' (not 'Shankar swayam', ch. 6), 'samharo' (not 'sanharo', ch. 23), 'Sankat ten' (not 'Sankat se', ch. 26), 'koi … soi' (ch. 28), 'Hanuman chalisa' in its metrical form चलीसा (ch. 39) and 'hriday mahan' (हृदय महँ, not 'मँह', ch. 40). Obvious OCR slips in the scan were corrected against the other sources. The Gita Press scan shows 'लषन' in two places, an older spelling of 'लखन'; we print 'लखन' throughout.

मूल पाठ को यहाँ बताए गए स्रोतों से पंक्ति-दर-पंक्ति मिलाया गया है। अर्थ AI की मदद से लिखा गया मसौदा हैं। अभी किसी विद्वान ने इनकी जाँच नहीं की है।

ये अर्थ हमारा पहला मसौदा हैं। अभी किसी विद्वान ने इनकी जाँच नहीं की है। कोई भूल दिखे तो हमें ज़रूर बताएँ।

त्रुटि बताएँ अंतिम अद्यतन 2026-09-27

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