वरलक्ष्मी व्रत 2027

वरलक्ष्मी व्रत वरदान देने वाली माँ लक्ष्मी का व्रत है, जिसे आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु की सुहागिन महिलाएँ श्रावण पूर्णिमा से पहले वाले शुक्रवार को रखती हैं। 2027 में भारत में यह शुक्रवार, 13 अगस्त 2027 को है।

भारत की तिथि

शुक्रवार, 13 अगस्त 2027

Friday before Shravana Purnima (New Delhi)

दुनिया भर की तिथियाँ · 2027

क्षेत्रतिथिसमय
भारतनई दिल्ली शुक्रवार, 13 अगस्त 2027 Friday before Shravana Purnima (New Delhi)
अमेरिका (पूर्व)एडिसन, न्यू जर्सी इस क्षेत्र की तिथि की हमने अभी पुष्टि नहीं की है। कृपया अपने स्थानीय मंदिर से पूछ लें।
अमेरिका (पश्चिम)सैन होज़े, कैलिफ़ोर्निया इस क्षेत्र की तिथि की हमने अभी पुष्टि नहीं की है। कृपया अपने स्थानीय मंदिर से पूछ लें।
ब्रिटेनलंदन इस क्षेत्र की तिथि की हमने अभी पुष्टि नहीं की है। कृपया अपने स्थानीय मंदिर से पूछ लें।
कनाडाटोरंटो इस क्षेत्र की तिथि की हमने अभी पुष्टि नहीं की है। कृपया अपने स्थानीय मंदिर से पूछ लें।
ऑस्ट्रेलियासिडनी इस क्षेत्र की तिथि की हमने अभी पुष्टि नहीं की है। कृपया अपने स्थानीय मंदिर से पूछ लें।

तिथि स्रोत: drikpanchang.com (नई दिल्ली). हर क्षेत्र और वर्ष की तिथि उद्धृत प्रकाशित पंचांग से ली गई है; जिन क्षेत्रों की पुष्टि नहीं हो सकी, वे छोड़ दिए गए हैं।

परिचय

मान्यता है कि वरलक्ष्मी की पूजा आठों लक्ष्मियों (अष्टलक्ष्मी) की पूजा के बराबर है, जो धन, धान्य, साहस, संतान और बहुत कुछ देती हैं। कलश को देवी का रूप दिया जाता है: नारियल पर देवी का मुख, गहने और साड़ी। महिलाएँ दाहिनी कलाई पर नौ गाँठों वाला पीला धागा बाँधती हैं, नौ तरह का नैवेद्य चढ़ाती हैं और दूसरी सुहागिनों को घर बुलाकर तांबूल देती हैं।

व्रत कथा चारुमती की है, एक पतिव्रता स्त्री जिसे देवी ने सपने में दर्शन देकर यह व्रत बताया।

पूजा विधि

हर चरण पूरा होने पर टिक करते जाएँ। ये टिक केवल इसी डिवाइस पर रहते हैं।

रीति-रिवाज परिवार और क्षेत्र के अनुसार बदलते हैं। जहाँ अंतर हो, अपनी पारिवारिक परंपरा और मंदिर का पालन करें।

पूजा सामग्री

पाठ करें

प्रश्न

2027 में वरलक्ष्मी व्रत भारत में कब है?

शुक्रवार, 13 अगस्त 2027 को (नई दिल्ली पंचांग)। पंचांगों में उस दिन पूजा के एक से ज़्यादा मुहूर्त होते हैं, जिनमें एक शाम का भी है। नौकरी करने वालों के लिए यह सुविधा की बात है।

हम विदेश में रहते हैं। क्या हमारे यहाँ भी यही तारीख़ है?

हम सिर्फ़ भारत की तारीख़ देते हैं। व्रत श्रावण पूर्णिमा से पहले वाले शुक्रवार को होता है, इसलिए विदेश में भी आमतौर पर यही तारीख़ रहती है, पर स्थानीय पंचांग अलग हो सकते हैं। अपने मंदिर से पूछ लें।

क्या वरलक्ष्मी व्रत किसी और शुक्रवार को कर सकते हैं?

हाँ। पूर्णिमा से पहले वाला शुक्रवार न हो पाए तो परंपरा में श्रावण के किसी और शुक्रवार को व्रत करने की छूट है।

क्या अविवाहित लड़कियाँ यह व्रत कर सकती हैं?

परंपरा से यह सुहागिनों का व्रत है। बहुत से घरों में बेटियाँ माँ के साथ बैठकर पूजा में शामिल होती हैं। अपने घर की रीति मानें।

केले के तने या देवी का चाँदी का मुख नहीं मिल रहा। क्या करें?

कोई बात नहीं। स्टील या पीतल का साफ़ लोटा कलश बन सकता है और मुख की जगह लक्ष्मी जी की छपी तस्वीर रख सकते हैं। जो फूल-पत्ते मिलें, उन्हीं से सजाएँ। असली बात पूजा और कथा है।

← सभी त्योहार · पंचांग