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श्री हनुमान चालीसा: चौपाई ३८

जो सत बार पाठ कर कोई। Jo Sat Bar Path Kar Koi

छूटहि बंदि महा सुख होई॥ Chhutahi Bandi Maha Sukh Hoi

भावार्थ

जो कोई इसका सौ बार पाठ करता है, वह बंधनों से छूट जाता है और उसे महान सुख मिलता है।

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
जो Jo जो
सत Sat सौ
बार Bar बार
पाठ Path पाठ
कर Kar करता है
कोई Koi कोई
छूटहि Chhutahi छूट जाता है
बंदि Bandi बंधन
महा Maha महान
सुख Sukh सुख
होई Hoi होता है

इस पद का महत्व

'सत बार' का शाब्दिक अर्थ है सौ बार; कुछ लोग 'सत' को 'सच्चे मन से' भी पढ़ते हैं। 'बंदि' से सांसारिक बंधन और कारावास, दोनों अर्थ लिए जाते हैं।

यह पद दूसरी लिपियों में पढ़ें
IAST (scholarly)
jo sata bāra pāṭha kara koī|chūṭahi baṃdi mahā sukha hoī||
Telugu
జో సత్ బార్ పాఠ్ కర్ కోఈ।ఛూటహి బంది మహా సుఖ్ హోఈ॥
Tamil
ஜோ ஸத் பா³ர் பாட்² கர் கோஈ।சூ²டஹி ப³ந்தி³ மஹா ஸுக்² ஹோஈ॥
Kannada
ಜೋ ಸತ್ ಬಾರ್ ಪಾಠ್ ಕರ್ ಕೋಈ।ಛೂಟಹಿ ಬಂದಿ ಮಹಾ ಸುಖ್ ಹೋಈ॥
Malayalam
ജോ സത് ബാര് പാഠ് കര് കോഈ।ഛൂടഹി ബംദി മഹാ സുഖ് ഹോഈ॥
Gujarati
જો સત્ બાર્ પાઠ્ કર્ કોઈ।છૂટહિ બંદિ મહા સુખ્ હોઈ॥
Bengali
জো সত্ বার্ পাঠ্ কর্ কোঈ।ছূটহি বংদি মহা সুখ্ হোঈ॥

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