नवरात्रि: देवी के साथ नौ रातें
शारदीय नवरात्रि की हर रात एक छोटा पाठ: दुर्गा चालीसा और आरती जय अम्बे गौरी, बीच की तीन रातों में लक्ष्मी और अंतिम तीन रातों में सरस्वती की स्तुति के साथ। हर रात उस दिन पूजी जाने वाली देवी के रूप का नाम बताती है।
9 रातें · हर बार लगभग 17 मिनट
संकल्प पूरा हुआ। आपने हर चरण निभाया।
दिन-ब-दिन
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वक्रतुण्ड महाकाय · श्री दुर्गा चालीसा · जय अम्बे गौरी
प्रतिपदा: घटस्थापना। देवी की पूजा शैलपुत्री, पर्वतराज की पुत्री, के रूप में होती है। हर पूजा की तरह गणेश जी से आरंभ करें।
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श्री दुर्गा चालीसा · जय अम्बे गौरी
द्वितीया: ब्रह्मचारिणी, तपस्या में लीन देवी।
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श्री दुर्गा चालीसा · जय अम्बे गौरी
तृतीया: चंद्रघंटा, जिनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है।
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श्री दुर्गा चालीसा · महालक्ष्म्यष्टकम् · जय अम्बे गौरी
चतुर्थी: कूष्मांडा, जिनकी मुस्कान से सृष्टि रची गई। आज से तीन रातें महालक्ष्मी अष्टकम भी साथ है।
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श्री दुर्गा चालीसा · महालक्ष्म्यष्टकम् · जय अम्बे गौरी
पंचमी: स्कंदमाता, कार्तिकेय की माता।
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श्री दुर्गा चालीसा · महालक्ष्म्यष्टकम् · जय अम्बे गौरी
षष्ठी: कात्यायनी, ऋषि कात्यायन के आश्रम में प्रकट योद्धा रूप।
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श्री दुर्गा चालीसा · सरस्वती वंदना (या कुन्देन्दु) · जय अम्बे गौरी
सप्तमी: कालरात्रि, भय हरने वाला उग्र रूप। आज से अंतिम तीन रातें सरस्वती वंदना भी साथ है।
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श्री दुर्गा चालीसा · सरस्वती वंदना (या कुन्देन्दु) · जय अम्बे गौरी
अष्टमी: महागौरी, उज्ज्वल और शांत। बहुत से परिवार आज या कल कन्या पूजन करते हैं।
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श्री दुर्गा चालीसा · सरस्वती वंदना (या कुन्देन्दु) · जय अम्बे गौरी
नवमी: सिद्धिदात्री, सब सिद्धियाँ देने वाली। कल विजयादशमी है।
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