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श्री हनुमान चालीसा: चौपाई २८
और मनोरथ जो कोइ लावै। Aur Manorath Jo Koi Lavai
सोइ अमित जीवन फल पावै॥ Soi Amit Jivan Phal Pavai
भावार्थ
जो कोई भी अपनी कोई मनोकामना लेकर आपके पास आता है, वह जीवन का असीम फल प्राप्त करता है।
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| और Aur | कोई भी अन्य |
| मनोरथ Manorath | मनोकामना |
| जो Jo | जो |
| कोइ Koi | कोई |
| लावै Lavai | लेकर आता है |
| सोइ Soi | वही |
| अमित Amit | असीम |
| जीवन Jivan | जीवन |
| फल Phal | फल |
| पावै Pavai | पाता है |
इस पद का महत्व
गीता प्रेस में 'कोइ … सोइ' पाठ है; प्रचलित संस्करणों में 'कोई … सोई' और कहीं 'तासु' मिलता है। अर्थ वही है।
यह पद दूसरी लिपियों में पढ़ें
- IAST (scholarly)
- aura manoratha jo koi lāvai|soi amita jīvana phala pāvai||
- Telugu
- ఔర్ మనోరథ్ జో కోఇ లావై।సోఇ అమిత్ జీవన్ ఫల్ పావై॥
- Tamil
- ஔர் மநோரத்² ஜோ கோஇ லாவை।ஸோஇ அமித் ஜீவந் ப²ல் பாவை॥
- Kannada
- ಔರ್ ಮನೋರಥ್ ಜೋ ಕೋಇ ಲಾವೈ।ಸೋಇ ಅಮಿತ್ ಜೀವನ್ ಫಲ್ ಪಾವೈ॥
- Malayalam
- ഔര് മനോരഥ് ജോ കോഇ ലാവൈ।സോഇ അമിത് ജീവന് ഫല് പാവൈ॥
- Gujarati
- ઔર્ મનોરથ્ જો કોઇ લાવૈ।સોઇ અમિત્ જીવન્ ફલ્ પાવૈ॥
- Bengali
- ঔর্ মনোরথ্ জো কোই লাবৈ।সোই অমিত্ জীবন্ ফল্ পাবৈ॥