शिव पञ्चाक्षर स्तोत्रम्

Shiv Panchakshar Stotram

शिव पञ्चाक्षर स्तोत्रम् पाँच श्लोकों का संस्कृत स्तोत्र है, जिसे परंपरा आदि शंकराचार्य की रचना मानती है। यह "न-मः शि-वा-य" मंत्र के पाँच अक्षरों पर आधारित है। हर श्लोक शिव की स्तुति करके उन्हें क्रम से न, म, शि, व और य अक्षर रूप में नमस्कार करता है। अंत की फलश्रुति कहती है कि इसके पाठ से शिवलोक मिलता है। इसे अभिषेक के समय, सोमवार और महाशिवरात्रि पर गाया जाता है।

  • 6 पद
  • 3 मिनट
  • आदि शंकराचार्य (परंपरा के अनुसार)
  • उत्तम दिन: सोमवार

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नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनायNagendraharaya Trilochanaya

भस्माङ्गरागाय महेश्वराय।Bhasmangaragaya Maheshvaraya

नित्याय शुद्धाय दिगम्बरायNityaya Shuddhaya Digambaraya

तस्मै नकाराय नमः शिवाय॥Tasmai Nakaraya Namah Shivaya

जो नागराज को हार के रूप में धारण करते हैं, जिनके तीन नेत्र हैं, जिनके अंगों पर भस्म का लेप है, जो महेश्वर हैं; जो नित्य हैं, शुद्ध हैं और दिशाएँ ही जिनके वस्त्र हैं, "न" अक्षर रूप उन भगवान शिव को नमस्कार है।

मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चितायMandakini Salila Chandana Charchitaya

नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय।Nandishvara Pramathanatha Maheshvaraya

मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजितायMandara Pushpa Bahupushpa Supujitaya

तस्मै मकाराय नमः शिवाय॥Tasmai Makaraya Namah Shivaya

जिनका अभिषेक मंदाकिनी (गंगा) के जल और चंदन से होता है, जो नंदीश्वर और प्रमथ गणों के स्वामी महेश्वर हैं, जिनकी पूजा मंदार और अनेक प्रकार के पुष्पों से होती है, "म" अक्षर रूप उन भगवान शिव को नमस्कार है।

शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द-Shivaya Gauri Vadanabja Vrinda

सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय।Suryaya Dakshadhvara Nashakaya

श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजायShri Nilakanthaya Vrishadhvajaya

तस्मै शिकाराय नमः शिवाय॥Tasmai Shikaraya Namah Shivaya

जो कल्याणस्वरूप हैं, जो गौरी के मुख-कमल को खिलाने वाले सूर्य के समान हैं, जिन्होंने दक्ष के यज्ञ का नाश किया, जिनका कंठ नीला है और जिनकी ध्वजा पर वृषभ अंकित है, "शि" अक्षर रूप उन भगवान शिव को नमस्कार है।

वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य-Vasishtha Kumbhodbhava Gautamarya

मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय।Munindra Devarchita Shekharaya

चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनायChandrarka Vaishvanara Lochanaya

तस्मै वकाराय नमः शिवाय॥Tasmai Vakaraya Namah Shivaya

जिनके मस्तक की पूजा वसिष्ठ, अगस्त्य, गौतम जैसे श्रेष्ठ मुनि और देवता करते हैं, और चंद्रमा, सूर्य व अग्नि जिनके तीन नेत्र हैं, "व" अक्षर रूप उन भगवान शिव को नमस्कार है।

यक्षस्वरूपाय जटाधरायYakshasvarupaya Jatadharaya

पिनाकहस्ताय सनातनाय।Pinakahastaya Sanatanaya

दिव्याय देवाय दिगम्बरायDivyaya Devaya Digambaraya

तस्मै यकाराय नमः शिवाय॥Tasmai Yakaraya Namah Shivaya

जिन्होंने यक्ष का रूप धारण किया, जो जटाधारी हैं, जिनके हाथ में पिनाक धनुष है, जो सनातन हैं; जो दिव्य हैं, देव हैं और दिगंबर हैं, "य" अक्षर रूप उन भगवान शिव को नमस्कार है।

पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ।Panchaksharamidam Punyam Yah Pathet Shivasannidhau

शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥Shivalokam Avapnoti Shivena Saha Modate

जो कोई इस पवित्र पञ्चाक्षर स्तोत्र का पाठ भगवान शिव के समीप करता है, वह शिवलोक को प्राप्त करता है और वहाँ शिव के साथ आनंदित होता है।

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प्रश्न

"पञ्चाक्षर" का क्या अर्थ है?

"पञ्च" यानी पाँच और "अक्षर" यानी वर्ण। पञ्चाक्षरी मंत्र "नमः शिवाय" है, जो पाँच अक्षरों से बना है: न, मः, शि, वा, य। स्तोत्र में हर अक्षर पर एक श्लोक है।

शिव पञ्चाक्षर स्तोत्र की रचना किसने की?

परंपरा के अनुसार आठवीं शताब्दी के अद्वैत आचार्य आदि शंकराचार्य ने, और मानक पाठों की पुष्पिका में उन्हीं का नाम है। शिवानन्द लहरी और शिवापराध क्षमापन स्तोत्र जैसे कई और शिव स्तोत्र भी उनके नाम से प्रसिद्ध हैं।

पञ्चाक्षर स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?

शिवलिंग पर जल, दूध या बेलपत्र चढ़ाते समय, ख़ासकर सोमवार, प्रदोष, सावन और महाशिवरात्रि पर। फलश्रुति इसे शिव के समीप पढ़ने को कहती है, यानी मंदिर में या घर के पूजा-स्थान में। बहुत से भक्त इसके बाद "ॐ नमः शिवाय" का १०८ बार जाप करते हैं।

स्रोत और समीक्षा

स्रोत: Shiva Panchakshara Stotram, sanskritdocuments.org (doc_shiva/panch, encoded and translated by Anand Hudli) and "Prabhata Stotranidhi" (stotranidhi.com, Devanagari); both carry the colophon naming Shri Shankaracharya

Variants: v2 line 1 "मन्दाकिनि" (short i) in sanskritdocuments vs "मन्दाकिनी" in stotranidhi (we use "मन्दाकिनी"); v2 line 3 "मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय" (sanskritdocuments, and the most widely sung form) vs "मन्दारमुख्यबहुपुष्पसुपूजिताय" (stotranidhi); sanskritdocuments also records "मकारमहिताय" for "मकाराय". v3 "वृन्द" (sanskritdocuments) vs "बृन्द" (stotranidhi). stotranidhi omits the phalashruti; we give it from sanskritdocuments, with "पञ्चाक्षर" for "पंचाक्षर" (same word).

मूल पाठ को यहाँ बताए गए स्रोतों से पंक्ति-दर-पंक्ति मिलाया गया है। अर्थ AI की मदद से लिखा गया मसौदा हैं। अभी किसी विद्वान ने इनकी जाँच नहीं की है।

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त्रुटि बताएँ अंतिम अद्यतन 2026-09-27

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