सुखकर्ता दुःखहर्ता
Sukhkarta Dukhharta
सुखकर्ता दुःखहर्ता सत्रहवीं सदी के संत समर्थ रामदास की गणेश जी की मराठी आरती है। "जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती" टेक और तीन पदों में गणपति को सुख देने वाला और दुख हरने वाला कहा गया है, और उनके सिंदूरी रूप, आभूषणों और तीन नेत्रों का वर्णन है। महाराष्ट्र में लगभग हर गणेश पूजा इसी से शुरू होती है, और गणेशोत्सव में सुबह-शाम यही गाई जाती है।
- 4 पद
- 3 मिनट
- समर्थ रामदास (१६०८–१६८२)
- उत्तम दिन: बुधवार
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।Jai Dev Jai Dev Jai Mangalmurti
दर्शनमात्रे मन कामना पूर्ती॥Darshanmatre Man Kamana Purti
जय हो देव, जय हो, हे मंगलमूर्ति, आपकी जय हो। आपके दर्शन मात्र से मन की कामनाएँ पूरी हो जाती हैं।
महाराष्ट्र में आरती पहले पद से शुरू होती है, और यह टेक उसके बाद तथा हर पद के बाद गाई जाती है। बहुत लोग "मनकामना पुरती" गाते हैं, यह भी प्रचलित पाठ है।
सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची।Sukhkarta Dukhharta Varta Vighnachi
नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची।Nuravi Puravi Prem Kripa Jayachi
सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची।Sarvangi Sundar Uti Shendurachi
कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची॥Kanthi Jhalke Mal Muktaphalanchi
आप सुख देने वाले और दुख हरने वाले हैं; विघ्नों का नाम तक नहीं रहने देते। आप भरपूर प्रेम देते हैं और आपकी कृपा सब तक पहुँचती है। आपके सारे अंग सिंदूर के लेप से सुंदर हैं, और गले में मोतियों की माला झिलमिलाती है।
"नुरवी" (कुछ बाकी नहीं रहने देता) को अक्सर "नुर्वी" गाया जाता है। महाराष्ट्र में गणपति की मूर्तियों पर परंपरा से शेंदूर (सिंदूर) का लेप होता है। मराठी विकिपीडिया में "विघ्नांची", sanskritdocuments.org में "विघ्नाची" है।
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।Jai Dev Jai Dev Jai Mangalmurti
दर्शनमात्रे मन कामना पूर्ती॥Darshanmatre Man Kamana Purti
रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा।Ratnakhachit Phara Tuj Gaurikumara
चंदनाची उटी कुंकुम केशरा।Chandanachi Uti Kumkum Keshara
हिरेजडित मुकुट शोभतो बरा।Hirejadit Mukut Shobhato Bara
रुणझुणती नूपुरे चरणी घागरिया॥Runjhunati Nupure Charani Ghagariya
हे गौरी-पुत्र, आप रत्नों से जड़ा आभूषण पहनते हैं, और आप पर चंदन, कुमकुम और केसर का लेप है। हीरों से जड़ा मुकुट आप पर खूब सजता है, और चरणों में घुँघरू वाले नूपुर रुनझुन करते हैं।
"फरा" एक पुराने मराठी आभूषण का नाम है। मराठी विकिपीडिया में "कुमकुम" छपा है।
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।Jai Dev Jai Dev Jai Mangalmurti
दर्शनमात्रे मन कामना पूर्ती॥Darshanmatre Man Kamana Purti
लंबोदर पीतांबर फणिवरबंधना।Lambodar Pitambar Phanivarbandhana
सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना।Saral Sond Vakratunda Trinayana
दास रामाचा वाट पाहे सदना।Das Ramacha Vat Pahe Sadana
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवरवंदना॥Sankati Pavave Nirvani Rakshave Survarvandana
हे लंबोदर, पीतांबरधारी, नागराज को कमरबंद बनाए हुए; सीधी सूँड, वक्रतुंड और तीन नेत्रों वाले। राम का यह दास घर पर आपकी राह देख रहा है। संकट में दौड़कर आइए और अंत समय में रक्षा कीजिए, हे श्रेष्ठ देवताओं से वंदित।
"दास रामाचा", यानी राम का दास, समर्थ रामदास की छाप है। गणेश जी की मूर्तियों में तीसरा नेत्र कम होता है, पर मोरगाँव के मयूरेश्वर की मूर्ति में है, और मराठी परंपरा मानती है कि यह आरती उसी मूर्ति से प्रेरित है। sanskritdocuments.org में अंतिम पंक्ति दो पंक्तियों में छपी है।
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।Jai Dev Jai Dev Jai Mangalmurti
दर्शनमात्रे मन कामना पूर्ती॥Darshanmatre Man Kamana Purti
पूर्ण
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प्रश्न
सुखकर्ता दुःखहर्ता किसने लिखी?
सत्रहवीं सदी के मराठी संत समर्थ रामदास (१६०८–१६८२) ने, जिन्होंने दासबोध और मनाचे श्लोक भी लिखे। अंतिम पद में "दास रामाचा" (राम का दास) कहकर उन्होंने अपनी छाप दी है।
यह आरती कब गाई जाती है?
महाराष्ट्र में लगभग हर गणेश पूजा की पहली आरती यही होती है, और गणेशोत्सव में जितने दिन गणपति घर या पंडाल में रहते हैं, सुबह-शाम यही गाई जाती है। बहुत से मराठी परिवार इसे रोज़ और संकष्टी चतुर्थी पर गाते हैं।
"नुरवी" सही है या "नुर्वी"?
"नुरवी"। इसका अर्थ है "कुछ बाकी नहीं रहने देता": गणपति विघ्नों की बात तक नहीं रहने देते। गाते समय जल्दी में इसे "नुर्वी" बोला जाता है, गाने में यह ठीक है।
क्या यह "जय गणेश देवा" वाली ही आरती है?
नहीं। "सुखकर्ता दुःखहर्ता" समर्थ रामदास की मराठी आरती है। "जय गणेश देवा" हिंदी आरती है, जो पूरे उत्तर भारत में गाई जाती है। बहुत से परिवार दोनों एक के बाद एक गाते हैं।
आरती में कितना समय लगता है?
हर पद के बाद टेक गाते हुए लगभग तीन मिनट।
स्रोत और समीक्षा
स्रोत: Marathi aarti by Samarth Ramdas as given in the sanskritdocuments.org Marathi Arati Collection (marathi/documents/maaratii-5.itx, ITRANS, which notes "The Arati is by Samartha Ramadas"), cross-checked line by line with the text quoted on Marathi Wikipedia (सुखकर्ता दुःखहर्ता)
Both sources agree on every word. Spelling differences: mr.wikipedia "दुखहर्ता", "विघ्नांची", "कुमकुम", "हिरेजडित" and "मन कामना पूर्ती"; sanskritdocuments.org "duHkhahartaa" (दुःखहर्ता), "vighnaachii" (विघ्नाची), "kumkuma", "hiire jaDita" and "mana kaamanaapurtii". We print दुःखहर्ता, विघ्नाची, कुंकुम, हिरेजडित and 'मन कामना पूर्ती'; many people sing 'मनकामना पुरती'. sanskritdocuments.org splits the last line of stanza 3 into two lines; we keep the four-line form of mr.wikipedia. The sung aarti begins with stanza 1; we print the refrain first so the reader can repeat it after each stanza.
मूल पाठ को यहाँ बताए गए स्रोतों से पंक्ति-दर-पंक्ति मिलाया गया है। अर्थ AI की मदद से लिखा गया मसौदा हैं। अभी किसी विद्वान ने इनकी जाँच नहीं की है।
ये अर्थ हमारा पहला मसौदा हैं। अभी किसी विद्वान ने इनकी जाँच नहीं की है। कोई भूल दिखे तो हमें ज़रूर बताएँ।
मुख्य तथ्य
- रचयिता
- समर्थ रामदास (१६०८–१६८२)
- श्लोक / पद
- 4
- मूल भाषा
- मराठी
- स्रोत संस्करण
- Marathi aarti by Samarth Ramdas as given in the sanskritdocuments.org Marathi Arati Collection (marathi/documents/maaratii-5.itx, ITRANS, which notes "The Arati is by Samartha Ramadas"), cross-checked line by line with the text quoted on Marathi Wikipedia (सुखकर्ता दुःखहर्ता)
- आख़िरी जाँच
- समीक्षा की स्थिति
- लिपि सत्यापित
इस पन्ने का संदर्भ दें
“सुखकर्ता दुःखहर्ता”. Nitya, अद्यतन 2026-10-04. https://getnitya.com/hi/ganesh/sukhkarta-dukhharta/