मधुराष्टकम्

Madhurashtakam

मधुराष्टकम् भगवान श्रीकृष्ण की आठ श्लोकों की संस्कृत स्तुति है, जिसे पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक श्री वल्लभाचार्य ने रचा। हर पंक्ति में एक ही शब्द 'मधुरं' आता है, और बताया गया है कि कृष्ण का सब कुछ मधुर है: अधर, मुस्कान, वेणु, चाल, सखा और गौएँ। इसकी टेक 'मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्' का अर्थ है 'मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है'।

  • 8 पद
  • 4 मिनट
  • श्री वल्लभाचार्य
  • उत्तम दिन: बुधवार

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अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम्।Adharam Madhuram Vadanam Madhuram Nayanam Madhuram Hasitam Madhuram

हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥Hridayam Madhuram Gamanam Madhuram Madhuradhipater Akhilam Madhuram

उनके अधर मधुर हैं, मुख मधुर है, नेत्र मधुर हैं, मुस्कान मधुर है। उनका हृदय मधुर है, चाल मधुर है। मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।

वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम्।Vachanam Madhuram Charitam Madhuram Vasanam Madhuram Valitam Madhuram

चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥Chalitam Madhuram Bhramitam Madhuram Madhuradhipater Akhilam Madhuram

उनके वचन मधुर हैं, चरित्र मधुर है, वस्त्र मधुर हैं, अंगों की भंगिमा मधुर है। उनका चलना मधुर है, विचरण मधुर है। मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।

वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ।Venur Madhuro Renur Madhurah Panir Madhurah Padau Madhurau

नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥Nrityam Madhuram Sakhyam Madhuram Madhuradhipater Akhilam Madhuram

उनकी वेणु मधुर है, चरण-रज मधुर है, हाथ मधुर हैं, चरण मधुर हैं। उनका नृत्य मधुर है, मित्रता मधुर है। मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।

गीतं मधुरं पीतं मधुरं भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरम्।Geetam Madhuram Peetam Madhuram Bhuktam Madhuram Suptam Madhuram

रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥Rupam Madhuram Tilakam Madhuram Madhuradhipater Akhilam Madhuram

उनका गाना मधुर है, पीना मधुर है, खाना मधुर है, सोना मधुर है। उनका रूप मधुर है, तिलक मधुर है। मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।

करणं मधुरं तरणं मधुरं हरणं मधुरं रमणं मधुरम्।Karanam Madhuram Taranam Madhuram Haranam Madhuram Ramanam Madhuram

वमितं मधुरं शमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥Vamitam Madhuram Shamitam Madhuram Madhuradhipater Akhilam Madhuram

उनके कर्म मधुर हैं, उद्धार करना मधुर है, चुराना मधुर है, क्रीड़ा मधुर है। उनका लुटाना मधुर है, शांत होना मधुर है। मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।

गुञ्जा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा।Gunja Madhura Mala Madhura Yamuna Madhura Vichi Madhura

सलिलं मधुरं कमलं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥Salilam Madhuram Kamalam Madhuram Madhuradhipater Akhilam Madhuram

उनकी गुंजा-माला मधुर है, पुष्प-माला मधुर है, यमुना मधुर है, उसकी लहरें मधुर हैं। उसका जल मधुर है, कमल मधुर हैं। मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।

गोपी मधुरा लीला मधुरा युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरम्।Gopi Madhura Leela Madhura Yuktam Madhuram Muktam Madhuram

दृष्टं मधुरं शिष्टं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥Drishtam Madhuram Shishtam Madhuram Madhuradhipater Akhilam Madhuram

गोपियाँ मधुर हैं, लीला मधुर है, उनका मिलन मधुर है, उनका छोड़ देना भी मधुर है। उनकी चितवन मधुर है, शिष्टता मधुर है। मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।

गोपा मधुरा गावो मधुरा यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा।Gopa Madhura Gavo Madhura Yashtir Madhura Srishtir Madhura

दलितं मधुरं फलितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥Dalitam Madhuram Phalitam Madhuram Madhuradhipater Akhilam Madhuram

ग्वाल-बाल मधुर हैं, गौएँ मधुर हैं, उनकी लकुटी मधुर है, उनकी सृष्टि मधुर है। उनका दुष्ट-दमन मधुर है, उनका दिया फल मधुर है। मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।

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प्रश्न

मधुराष्टकम् की रचना किसने की?

श्री वल्लभाचार्य (१४७९–१५३१) ने। वे पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक थे, जिसके केंद्र में श्रीनाथजी हैं। परंपरा के अनुसार बालकृष्ण के दर्शन के बाद उन्होंने इसे रचा, और स्तुति की पारंपरिक अंतिम पंक्ति भी इसे श्रीमद्वल्लभाचार्य-विरचित बताती है।

'मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्' का क्या अर्थ है?

'मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।' मधुराधिपति यानी मधुरता के स्वामी श्रीकृष्ण, और अखिलं मधुरम् यानी सब कुछ मधुर। यह पंक्ति हर श्लोक के अंत में आती है। आठ छोटे श्लोकों में 'मधुर' शब्द पचास से ज़्यादा बार आता है।

मधुराष्टकम् का पाठ कब करें?

किसी भी समय। बहुत से भक्त इसे शाम की कृष्ण-पूजा में, बुधवार और एकादशी को, जन्माष्टमी पर, या रात को लड्डू गोपाल को सुलाते समय धीरे-धीरे गाते हैं। इसमें लगभग चार मिनट लगते हैं। परंपरा के अनुसार प्रेम से इसका पाठ करने से मन मधुर होता है और भगवान से स्नेह बढ़ता है।

मधुराष्टकम् में कितने श्लोक हैं?

आठ, इसीलिए इसे अष्टकम् कहते हैं ('अष्ट' यानी आठ)। हर श्लोक में दो पंक्तियाँ हैं और अंत में वही टेक आती है।

स्रोत और समीक्षा

स्रोत: Madhurashtakam of Shri Vallabhacharya; text as given by sanskritdocuments.org (madhurst.itx), cross-checked against Sanskrit Wikisource (मधुराष्टकम्), shlokam.org and JKYog

Variants: verse 2 in Wikisource reads 'वसनं… चरितं… वचनं' in a different order; verse 5 in shlokam.org reads 'स्मरणं' for 'रमणं'; verse 7 in Wikisource reads 'राधा मधुरा मिलनं मधुरम्' for 'युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरम्'. We follow sanskritdocuments.org, which agrees with JKYog and most recitations. The phrase 'मधुराधिपतेरखिलं' is sandhi of 'मधुराधिपतेः + अखिलं'.

मूल पाठ को यहाँ बताए गए स्रोतों से पंक्ति-दर-पंक्ति मिलाया गया है। अर्थ AI की मदद से लिखा गया मसौदा हैं। अभी किसी विद्वान ने इनकी जाँच नहीं की है।

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त्रुटि बताएँ अंतिम अद्यतन 2026-09-27

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