अहोई अष्टमी व्रत कथा
Ahoi Ashtami Vrat Katha
अहोई अष्टमी व्रत कथा वह कहानी है जो माताएँ अहोई अष्टमी पर पढ़ती हैं, जो करवा चौथ के कुछ दिन बाद संतान के लिए रखा जाने वाला व्रत है। इसमें एक साहूकारनी की कथा है, जिससे मिट्टी खोदते समय अनजाने में सेही का बच्चा मर गया, जिसने अपने सात बेटे खो दिए, और भूल मानकर व्रत रखने पर अहोई माता ने उसे उसके बेटे लौटा दिए। यह कथा शाम को, तारे देखकर व्रत खोलने से पहले पढ़ी जाती है।
- 11 पद
- 7 मिनट
- पारंपरिक कथा; यह पुनर्कथन नित्या का है
बहुत समय पहले एक नगर में एक साहूकार रहता था। उसकी पत्नी के सात बेटे थे। घर धन-धान्य से भरा था और बच्चों की हँसी से गूँजता रहता था।Bahut samay pehle ek nagar mein ek sahukar rehta tha. Uski patni ke saat bete the. Ghar dhan-dhaanya se bhara tha aur bachchon ki hansi se goonjta rehta tha.
साहूकार की पत्नी और उसके सात बेटों का भरा-पूरा घर।
दीवाली से कुछ दिन पहले साहूकारनी घर लीपने के लिए मिट्टी लाने जंगल की ओर गई। वहाँ एक टीले के पास वह कुदाल से मिट्टी खोदने लगी।Diwali se kuchh din pehle sahukarni ghar leepne ke liye mitti laane jangal ki or gayi. Vahan ek teele ke paas vah kudaal se mitti khodne lagi.
दीवाली से पहले साहूकारनी जंगल में टीले के पास मिट्टी खोदने गई।
पुराने गाँवों में दीवाली से पहले घर की दीवारें और आँगन मिट्टी और गोबर से लीपे जाते थे। कई कथाओं में वह घर की मरम्मत या नया घर बनाने के लिए मिट्टी खोदती है।
उस टीले में एक सेही (स्याहु) की माँद थी, जिसमें उसके छोटे-छोटे बच्चे रहते थे। अनजाने में साहूकारनी की कुदाल एक बच्चे को लग गई और वह मर गया।Us teele mein ek sehi (syahu) ki maand thi, jismein uske chhote-chhote bachche rehte the. Anjaane mein sahukarni ki kudaal ek bachche ko lag gayi aur vah mar gaya.
अनजाने में साहूकारनी की कुदाल से सेही का एक बच्चा मर गया।
सेही या स्याहु एक काँटेदार जीव है, जिसे अंग्रेज़ी में पोर्क्यूपाइन कहते हैं। इसीलिए अहोई माता के चित्र में सेही और उसके बच्चे बनाए जाते हैं।
यह देखकर साहूकारनी का मन काँप उठा। उसे अपनी भूल पर बहुत पछतावा हुआ। वह भारी मन से मिट्टी लेकर घर लौट आई, पर यह बात किसी से कह न सकी।Yah dekhkar sahukarni ka man kaanp utha. Use apni bhool par bahut pachhtava hua. Vah bhaari man se mitti lekar ghar laut aayi, par yah baat kisi se keh na saki.
साहूकारनी को बहुत पछतावा हुआ, पर उसने यह बात किसी से नहीं कही।
कुछ समय बाद उसके बेटे एक-एक करके बीमार पड़ने लगे, और एक वर्ष के भीतर सातों बेटे चल बसे। साहूकारनी का दुख कहने से बाहर था। वह दिन-रात रोती रहती थी।Kuchh samay baad uske bete ek-ek karke beemar padne lage, aur ek varsh ke bheetar saaton bete chal base. Sahukarni ka dukh kehne se bahar tha. Vah din-raat roti rehti thi.
एक वर्ष के भीतर साहूकारनी के सातों बेटे चल बसे।
एक दिन उसने गाँव की बड़ी-बूढ़ी स्त्रियों के सामने अपना मन खोल दिया। उसने रोते हुए कहा, “मैंने जान-बूझकर कोई पाप नहीं किया। अनजाने में सेही का बच्चा मुझसे मर गया था। तभी से मेरा सब कुछ उजड़ गया।”Ek din usne gaon ki badi-boodhi striyon ke saamne apna man khol diya. Usne rote hue kaha, “Maine jaan-boojhkar koi paap nahin kiya. Anjaane mein sehi ka bachcha mujhse mar gaya tha. Tabhi se mera sab kuchh ujad gaya.”
साहूकारनी ने गाँव की बुज़ुर्ग स्त्रियों को अपनी भूल बताई।
स्त्रियों ने उसे ढाढ़स बँधाया और कहा, “तुमने अपनी भूल सच्चे मन से मान ली है, इससे तुम्हारा आधा पाप धुल गया। अब कार्तिक कृष्ण अष्टमी को अहोई माता का व्रत रखो। दीवार पर सेही और उसके बच्चों का चित्र बनाकर अहोई माता की पूजा करो और अपनी भूल की क्षमा माँगो।”Striyon ne use dhaadhas bandhaya aur kaha, “Tumne apni bhool sachche man se maan li hai, isse tumhara aadha paap dhul gaya. Ab Kartik Krishna Ashtami ko Ahoi Mata ka vrat rakho. Deewar par sehi aur uske bachchon ka chitra banakar Ahoi Mata ki pooja karo aur apni bhool ki kshama maango.”
स्त्रियों ने उसे कार्तिक कृष्ण अष्टमी को अहोई माता का व्रत और पूजा करने को कहा।
साहूकारनी ने वैसा ही किया। अष्टमी के दिन उसने सुबह से व्रत रखा। शाम को दीवार पर अहोई माता, सेही और उसके बच्चों का चित्र बनाया, जल से भरा करवा रखकर पूजा की और सच्चे मन से क्षमा माँगी। रात को तारे निकलने पर उसने तारों को अर्घ्य दिया और तब व्रत खोला। हर वर्ष वह यह व्रत इसी श्रद्धा से करती रही।Sahukarni ne vaisa hi kiya. Ashtami ke din usne subah se vrat rakha. Shaam ko deewar par Ahoi Mata, sehi aur uske bachchon ka chitra banaya, jal se bhara karva rakhkar pooja ki aur sachche man se kshama maangi. Raat ko taare nikalne par usne taaron ko arghya diya aur tab vrat khola. Har varsh vah yah vrat isi shraddha se karti rahi.
साहूकारनी ने अष्टमी को व्रत रखा, अहोई माता की पूजा की और तारे देखकर व्रत खोला।
अहोई माता उसकी सच्ची भक्ति से प्रसन्न हुईं। कहते हैं, उनकी कृपा से साहूकारनी के सातों बेटे उसे फिर मिल गए, और घर में फिर से खुशियाँ लौट आईं।Ahoi Mata uski sachchi bhakti se prasann huin. Kehte hain, unki kripa se sahukarni ke saaton bete use phir mil gaye, aur ghar mein phir se khushiyan laut aayin.
अहोई माता की कृपा से साहूकारनी को उसके सातों बेटे फिर मिल गए।
कुछ कथाओं में बेटे फिर जीवित हो उठते हैं, कुछ में उसे फिर से सात बेटों का वरदान मिलता है। परिवार दोनों तरह से सुनाते हैं।
तभी से माताएँ अपनी संतान की लंबी आयु और सुख के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रखती हैं। वे दीवार पर अहोई माता का चित्र बनाकर पूजा करती हैं और तारे देखकर व्रत खोलती हैं।Tabhi se maataayen apni santaan ki lambi aayu aur sukh ke liye Ahoi Ashtami ka vrat rakhti hain. Ve deewar par Ahoi Mata ka chitra banakar pooja karti hain aur taare dekhkar vrat kholti hain.
तभी से माताएँ संतान के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रखती हैं।
हे अहोई माता, जैसे आपने साहूकारनी की सूनी गोद फिर भर दी, वैसे ही सबकी संतान की रक्षा करना और सबकी गोद हरी-भरी रखना। बोलो अहोई माता की जय!He Ahoi Mata, jaise aapne sahukarni ki sooni god phir bhar di, vaise hi sabki santaan ki raksha karna aur sabki god hari-bhari rakhna. Bolo Ahoi Mata ki jai!
अहोई माता से सबकी संतान की रक्षा की प्रार्थना।
परिवार अपने शब्दों में ऐसी ही पंक्ति से कथा पूरी करते हैं और फिर अहोई माता व बड़ों को प्रणाम करते हैं।
पूर्ण
अहोई अष्टमी व्रत कथा का पाठ पूर्ण हुआ।
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प्रश्न
अहोई अष्टमी का व्रत कौन रखता है?
माताएँ, अपनी संतान की लंबी आयु और कुशलता के लिए। पहले यह मुख्य रूप से बेटों के लिए रखा जाता था, पर आज बहुत-सी माताएँ बेटे-बेटी, दोनों के लिए रखती हैं। संतान की कामना करने वाली कुछ स्त्रियाँ भी यह व्रत रखती हैं।
व्रत कब खोलें?
शाम को तारे निकलने के बाद। करवे से तारों को अर्घ्य देकर भोजन करें। कुछ परिवार चाँद की प्रतीक्षा करते हैं, जो इस रात देर से निकलता है। विदेश में अपने शहर में अँधेरा होने के समय के अनुसार चलें; बादल हों तो घर के चलन के अनुसार करें।
अहोई माता के चित्र में सेही क्यों होती है?
कथा के कारण। माँ का दुख तब शुरू होता है जब उससे अनजाने में सेही का बच्चा मर जाता है, इसलिए अहोई माता के साथ सेही और उसके बच्चे बनाए जाते हैं। उनकी साथ में पूजा करना क्षमा माँगने का ही भाग है।
गर्भवती हों या तबीयत ठीक न हो तो क्या पानी पी सकते हैं?
हाँ। सेहत पहले है, और परंपरा में व्रत में छूट हमेशा रही है। बहुत-सी माताएँ पानी, दूध या फल लेकर भी शाम की पूजा और कथा पूरी करती हैं। परिवार और डॉक्टर से सलाह कर लें।
स्रोत और समीक्षा
स्रोत: Nitya's retelling of the traditional story (Hindi, 2026), written for this site; not a transcription of any printed edition
Nitya's retelling of the traditional story. The Ahoi Ashtami katha has no single canonical wording. Our retelling follows the elements common to the most widely told version: a merchant's wife with seven sons; digging clay near a mound before Diwali; accidentally killing a sehi (porcupine) cub with her hoe; losing her sons within a year; confessing to the elder women, who say owning the mistake has removed half the sin and advise the Ahoi Ashtami fast with a drawing of the sehi and her cubs; and Ahoi Mata restoring her sons (told either as revival or as the blessing of seven sons again). A second widely told version, with seven daughters-in-law, a sister-in-law and the cow Surahi, is not included. The Hindi is our own wording, not copied from any book or website. Meanings are retellings of each paragraph; the Hindi meaning is a one-line gist.
मूल पाठ और अर्थ, दोनों अभी पहले मसौदे के रूप में हैं।
ये अर्थ हमारा पहला मसौदा हैं। अभी किसी विद्वान ने इनकी जाँच नहीं की है। कोई भूल दिखे तो हमें ज़रूर बताएँ।