शेज आरती: जय जय साईनाथ
Shej Aarti: Jai Jai Sainath
"जय जय साईनाथ" शेज आरती का मुख्य भजन है, वह रात की आरती जिससे शिरडी का दिन पूरा होता है। के. जे. भीष्म के लिखे इस मराठी भजन में एक टेक और तीन पद हैं। इनमें बाबा से विश्राम करने की विनती है, भक्तों के कष्ट उठाने के लिए उनका आभार है, और सुबह फिर आने का वचन है। शिरडी में यह रात 10 बजे और बहुत से साईं मंदिरों में दिन की अंतिम आरती में गाया जाता है।
- 4 पद
- 5 मिनट
- कृष्णशास्त्री जागेश्वर भीष्म (1854–1935), साईं बाबा के भक्त और शिरडी की आरती-पुस्तक के संकलनकर्ता
- उत्तम दिन: गुरुवार
जय जय साईनाथ आतां पहुडावें मंदिरीं हो ।Jai Jai Sainath Aata Pahudave Mandiri Ho
आळवितों सप्रेमें तुजला आरति घेउनि करीं हो ॥Aalavito Sapreme Tujala Aarti Gheuni Kari Ho
जय हो, जय हो साईनाथ! अब आप मंदिर में विश्राम कीजिए। हाथों में आरती लेकर हम प्रेम से आपको पुकारते हैं।
"पहुडावें" लेटकर सोने के लिए कोमल मराठी शब्द है। "आळवणें" यानी प्यार से पुकारना, जैसे माँ बच्चे को गाकर बुलाती है।
रंजविसी तूं मधुर बोलुनी माय जशी निज मुला हो ।Ranjavisi Tu Madhur Boluni Maay Jashi Nij Mula Ho
भोगिसि व्याधी तूंच हरुनियां निजसेवकदुःखाला हो ।Bhogisi Vyadhi Tunch Haruniya Nijsevak Dukhala Ho
धांवुनि भक्तव्यसन हरिसी दर्शन देसी त्याला हो ।Dhavuni Bhakta Vyasan Harisi Darshan Desi Tyala Ho
झाले असतील कष्ट अतिशय तुमचे या देहाला हो ॥Jhale Asatil Kashta Atishay Tumache Ya Dehala Ho
जैसे माँ अपने बच्चे को मीठे बोलों से बहलाती है, वैसे ही आप हमें बहलाते हैं। अपने सेवकों का दुःख हरकर उनकी व्याधि आप स्वयं भोगते हैं। दौड़कर भक्त का संकट हरते हैं और उसे दर्शन देते हैं। आपकी इस देह को बहुत कष्ट हुआ होगा।
Devotees believe Baba took the illnesses of those he loved upon himself; the Shri Sai Satcharita tells such stories. The stanza speaks from that belief.
जय जय साईनाथ आतां पहुडावें मंदिरीं हो ।Jai Jai Sainath Aata Pahudave Mandiri Ho
आळवितों सप्रेमें तुजला आरति घेउनि करीं हो ॥Aalavito Sapreme Tujala Aarti Gheuni Kari Ho
क्षमा शयन सुंदर ही शोभा सुमनशेज त्यावरी हो ।Kshama Shayan Sundar Hi Shobha Suman Shej Tyavari Ho
घ्यावी थोडी भक्तजनांची पूजनादि चाकरी हो ।Ghyavi Thodi Bhaktajananchi Pujanadi Chakari Ho
ओंवाळीतों पंचप्राण ज्योति सुमती करीं हो ।Ovalito Panchaprana Jyoti Sumati Kari Ho
सेवा किंकर भक्त प्रीती अत्तर परिमळ वारी हो ॥Seva Kinkar Bhakta Preeti Attar Parimal Vari Ho
हमें क्षमा कीजिए और शयन कीजिए; उस पर बिछी फूलों की सेज कितनी सुंदर लग रही है। भक्तों की पूजा आदि की थोड़ी सी सेवा स्वीकार कीजिए। निर्मल बुद्धि की ज्योति हाथ में लेकर हम पंचप्राणों से आपकी आरती उतारते हैं। आपके सेवक भक्त प्रेम से इत्र और सुगंधित जल अर्पित करते हैं।
शिरडी में शेज आरती के समय रात के लिए जल रखा जाता है। "क्षमा" को यहाँ "सहनशीलता" भी पढ़ा जा सकता है; अधिकतर अनुवाद इसे क्षमा-याचना मानते हैं।
जय जय साईनाथ आतां पहुडावें मंदिरीं हो ।Jai Jai Sainath Aata Pahudave Mandiri Ho
आळवितों सप्रेमें तुजला आरति घेउनि करीं हो ॥Aalavito Sapreme Tujala Aarti Gheuni Kari Ho
सोडुनि जाया दुःख वाटतें साई त्वच्चरणांसी हो ।Soduni Jaya Dukh Vatate Sai Twachcharanansi Ho
आज्ञेस्तव हा आशीरप्रसाद घेउनि निजसदनासी हो ।Aadnyestav Ha Ashirprasad Gheuni Nijsadanasi Ho
जातों आतां येऊं पुनरपि त्वच्चरणाचे पाशीं हो ।Jato Aata Yeu Punarapi Twachcharanache Pashi Ho
उठवूं तुजला साईमाउले निजहित साधायासी हो ॥Uthavu Tujala Saimaule Nijhit Sadhayasi Ho
हे साईं, आपके चरण छोड़कर जाने में दुःख होता है। आपकी आज्ञा से यह आशीर्वाद और प्रसाद लेकर हम अपने घर जाते हैं। अब जाते हैं, फिर आपके चरणों के पास लौट आएँगे। हे साईं माउली, अपने हित के लिए हम आपको जगाने आएँगे।
अंतिम पंक्ति अगली सुबह की काकड आरती की ओर संकेत करती है, जिसमें बाबा को जगाया जाता है; इस तरह दिन की चारों आरतियाँ एक चक्र बनाती हैं।
जय जय साईनाथ आतां पहुडावें मंदिरीं हो ।Jai Jai Sainath Aata Pahudave Mandiri Ho
आळवितों सप्रेमें तुजला आरति घेउनि करीं हो ॥Aalavito Sapreme Tujala Aarti Gheuni Kari Ho
पूर्ण
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प्रश्न
शेज आरती क्या है?
"शेज" यानी बिस्तर। यह रात की आरती है, शिरडी की रोज़ की चार आरतियों में अंतिम, जो संस्थान की समय-सारणी के अनुसार रात 10 बजे होती है। भक्त बाबा को रात के विश्राम के लिए विदा करते हैं, जैसे घर के लोग किसी बुज़ुर्ग को सुलाते हैं।
"जय जय साईनाथ" किसने लिखा?
कृष्णशास्त्री जागेश्वर भीष्म (1854–1935) ने। सुबह का भजन "काकड आरती करीतों" भी उन्हीं का है, और शिरडी की आरती-पुस्तक भी उन्होंने तैयार की।
क्या घर पर शेज आरती गा सकते हैं?
हाँ। बहुत से भक्त सोने से पहले बाबा की तस्वीर के सामने छोटा दीपक जलाकर इसे गाते हैं। कुछ रोज़ रात गाते हैं, कुछ केवल गुरुवार की रात।
भक्त साईं बाबा से सोने की विनती क्यों करते हैं?
हिंदू मंदिर-पूजा में दिन भर देवता की सेवा सम्मानित अतिथि की तरह होती है: जगाना, स्नान, भोग और फिर विश्राम। भक्त मानते हैं कि बाबा अपनी समाधि में विराजमान हैं, इसलिए वहाँ दिन इसी तरह पूरा होता है। भजन यह बात प्यार से कहता है: सबके कष्ट उठाते-उठाते बाबा थक गए होंगे।
स्रोत और समीक्षा
स्रोत: Marathi aarti by K. J. Bhishma from the Shirdi Shej aarti. Devanagari collated from sites.google.com/site/vaibhavbirit (Shej aarti, word by word) and hindipath.com (Sai Baba Shej Aarti); Roman and attribution checked against the aarti book of the Sri Shirdi Sai Baba Temple of Austin and shirdisaimyworld.blogspot.com (Shej aarti with meaning, credits Shri Krishna Jogeswar Bhishma)
Copyright: Bhishma died on 8 August 1935 (saiamrithadhara.com), so the text is public domain in India, and it was printed in the Shri Sainath Sagunopasana (to 1922 by Khaparde, Sansthan edition from 1923), before 1931. Readings: stanza 2, line 2 "पूजनादि चाकरी" (vaibhavbirit and Austin; hindipath has a garbled form). Stanza 3, line 2: vaibhavbirit has "आज्ञेस्तव आशीरप्रसाद"; hindipath and both Roman sources have "हा" after "आज्ञेस्तव", so we include it. Stanza 3, line 4: "साधायासी" as in both Roman sources (the Devanagari sources print "सादायासी"), and "साईमाउले" as in Austin and hindipath. In singing, the first three lines of each stanza are usually sung twice, and the first line of stanza 3 is sung once with "Baba" and once with "Sai".
मूल पाठ को यहाँ बताए गए स्रोतों से पंक्ति-दर-पंक्ति मिलाया गया है। अर्थ AI की मदद से लिखा गया मसौदा हैं। अभी किसी विद्वान ने इनकी जाँच नहीं की है।
ये अर्थ हमारा पहला मसौदा हैं। अभी किसी विद्वान ने इनकी जाँच नहीं की है। कोई भूल दिखे तो हमें ज़रूर बताएँ।
मुख्य तथ्य
- रचयिता
- कृष्णशास्त्री जागेश्वर भीष्म (1854–1935), साईं बाबा के भक्त और शिरडी की आरती-पुस्तक के संकलनकर्ता
- श्लोक / पद
- 4
- मूल भाषा
- मराठी
- स्रोत संस्करण
- Marathi aarti by K. J. Bhishma from the Shirdi Shej aarti. Devanagari collated from sites.google.com/site/vaibhavbirit (Shej aarti, word by word) and hindipath.com (Sai Baba Shej Aarti); Roman and attribution checked against the aarti book of the Sri Shirdi Sai Baba Temple of Austin and shirdisaimyworld.blogspot.com (Shej aarti with meaning, credits Shri Krishna Jogeswar Bhishma)
- आख़िरी जाँच
- समीक्षा की स्थिति
- लिपि सत्यापित
इस पन्ने का संदर्भ दें
“शेज आरती: जय जय साईनाथ”. Nitya, अद्यतन 2026-10-04. https://getnitya.com/hi/sai-baba/shej-aarti/