श्री वेंकटेश सुप्रभातम्

Sri Venkatesa Suprabhatam

श्री वेंकटेश सुप्रभातम् वह प्रभात-स्तोत्र है जिससे रोज़ सुबह तिरुमला में भगवान वेंकटेश्वर को जगाया जाता है, और परंपरा से इसे सूर्योदय से पहले गाया या सुना जाता है। इसके २९ संस्कृत श्लोक १५वीं शताब्दी में प्रतिवादि भयंकरम् अण्णन् ने रचे, और इसकी शुरुआत रामायण में बालक राम से कहे गए विश्वामित्र के वचन "कौसल्या सुप्रजा राम" से होती है। इस पृष्ठ पर ये २९ श्लोक हैं; प्रातःपाठ में इनके बाद आने वाले स्तोत्रम्, प्रपत्ति और मंगलाशासनम् अभी यहाँ नहीं हैं।

  • 29 पद
  • 12 मिनट
  • प्रतिवादि भयंकरम् अण्णंगराचार्य (अण्णन्), १५वीं शताब्दी
  • उत्तम दिन: शनिवार

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कौसल्या सुप्रजा राम पूर्वा सन्ध्या प्रवर्तते ।Kausalya Supraja Rama Purva Sandhya Pravartate

उत्तिष्ठ नरशार्दूल कर्तव्यं दैवमाह्निकम् ॥Uttishtha Narashardula Kartavyam Daivamahnikam

हे राम, कौसल्या के सुपुत्र! पूर्व दिशा में प्रभात की संध्या हो रही है। हे नरश्रेष्ठ, उठिए; दिन के पवित्र नित्यकर्म आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं।

उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविन्द उत्तिष्ठ गरुडध्वज ।Uttishthottishtha Govinda Uttishtha Garudadhvaja

उत्तिष्ठ कमलाकान्त त्रैलोक्यं मङ्गलं कुरु ॥Uttishtha Kamalakanta Trailokyam Mangalam Kuru

उठिए, उठिए, हे गोविंद! उठिए, हे गरुड़ध्वज! उठिए, हे लक्ष्मीकांत, और तीनों लोकों का मंगल कीजिए।

मातस्समस्तजगतां मधुकैटभारेःMatas Samasta Jagatam Madhukaitabhareh

वक्षोविहारिणि मनोहरदिव्यमूर्ते ।Vakshoviharini Manohara Divyamurte

श्रीस्वामिनि श्रितजनप्रियदानशीलेSri Swamini Shritajana Priya Danashile

श्रीवेङ्कटेशदयिते तव सुप्रभातम् ॥Sri Venkatesha Dayite Tava Suprabhatam

हे समस्त जगत की माता, मधु-कैटभ के संहारक विष्णु के वक्षस्थल पर विहार करने वाली, मनोहर दिव्य रूप वाली! हे स्वामिनी, शरणागतों को उनकी प्रिय वस्तु देने वाली, हे श्री वेंकटेश की प्रिया, आपका प्रभात मंगलमय हो।

तव सुप्रभातमरविन्दलोचनेTava Suprabhatam Aravinda Lochane

भवतु प्रसन्नमुखचन्द्रमण्डले ।Bhavatu Prasanna Mukha Chandra Mandale

विधिशङ्करेन्द्रवनिताभिरर्चितेVidhi Shankarendra Vanitabhir Archite

वृषशैलनाथदयिते दयानिधे ॥Vrishashaila Natha Dayite Dayanidhe

हे कमलनयनी, जिनका प्रसन्न मुख पूर्ण चंद्र-सा है; ब्रह्मा, शंकर और इंद्र की पत्नियाँ जिनकी पूजा करती हैं; हे वृषशैलनाथ की प्रिया, हे दयानिधि, आपका प्रभात मंगलमय हो।

अत्र्यादिसप्तऋषयस्समुपास्य सन्ध्यांAtryadi Saptarishayas Samupasya Sandhyam

आकाशसिन्धुकमलानि मनोहराणि ।Akasha Sindhu Kamalani Manoharani

आदाय पादयुगमर्चयितुं प्रपन्नाःAdaya Padayugam Archayitum Prapannah

शेषाद्रिशेखरविभो तव सुप्रभातम् ॥Sheshadri Shekhara Vibho Tava Suprabhatam

अत्रि आदि सप्तर्षि संध्या-उपासना करके, आकाशगंगा के मनोहर कमल लेकर आपके चरण-युगल की पूजा के लिए आए हैं। हे शेषाद्रि-शिखर के स्वामी, आपका सुप्रभात हो।

पञ्चाननाब्जभवषण्मुखवासवाद्याःPanchananabja Bhava Shanmukha Vasavadyah

त्रैविक्रमादिचरितं विबुधाः स्तुवन्ति ।Traivikramadi Charitam Vibudhah Stuvanti

भाषापतिः पठति वासरशुद्धिमारात्Bhashapatih Pathati Vasara Shuddhim Arat

शेषाद्रिशेखरविभो तव सुप्रभातम् ॥Sheshadri Shekhara Vibho Tava Suprabhatam

पंचमुख शिव, कमलजन्मा ब्रह्मा, षडानन कार्तिकेय, इंद्र आदि देवता आपके त्रिविक्रम आदि चरित्रों की स्तुति कर रहे हैं। वाणी के स्वामी बृहस्पति समीप खड़े होकर आज के दिन का पंचांग पढ़ रहे हैं। हे शेषाद्रि-शिखर के स्वामी, आपका सुप्रभात हो।

ईषत्प्रफुल्लसरसीरुहनारिकेल-Ishat Praphulla Sarasiruha Narikela

पूगद्रुमादिसुमनोहरपालिकानाम् ।Puga Drumadi Sumanohara Palikanam

आवाति मन्दमनिलस्सह दिव्यगन्धैःAvati Mandam Anilas Saha Divya Gandhaih

शेषाद्रिशेखरविभो तव सुप्रभातम् ॥Sheshadri Shekhara Vibho Tava Suprabhatam

थोड़े-थोड़े खिले कमलों और नारियल, सुपारी आदि वृक्षों की सुंदर पंक्तियों की दिव्य सुगंध लेकर मंद पवन बह रहा है। हे शेषाद्रि-शिखर के स्वामी, आपका सुप्रभात हो।

उन्मील्य नेत्रयुगमुत्तमपञ्जरस्थाःUnmilya Netrayugam Uttama Panjarasthah

पात्रावशिष्टकदलीफलपायसानि ।Patravashishta Kadali Phala Payasani

भुक्त्वा सलीलमथ केलिशुकाः पठन्तिBhuktva Salilam Atha Kelishukah Pathanti

शेषाद्रिशेखरविभो तव सुप्रभातम् ॥Sheshadri Shekhara Vibho Tava Suprabhatam

सुंदर पिंजरों में बैठे पालतू तोते आँखें खोलकर, अपने पात्रों में बचे केले और खीर खेल-खेल में खाकर, अब (आपका नाम) पढ़ने लगे हैं। हे शेषाद्रि-शिखर के स्वामी, आपका सुप्रभात हो।

तन्त्रीप्रकर्षमधुरस्वनया विपञ्च्याTantri Prakarsha Madhura Svanaya Vipanchya

गायत्यनन्तचरितं तव नारदोऽपि ।Gayatyananta Charitam Tava Naradopi

भाषासमग्रमसकृत्करचाररम्यंBhasha Samagram Asakrit Karachara Ramyam

शेषाद्रिशेखरविभो तव सुप्रभातम् ॥Sheshadri Shekhara Vibho Tava Suprabhatam

नारद मुनि भी तारों की झंकार से मधुर स्वर देने वाली अपनी वीणा पर, हाथ की सुंदर गति के साथ, पूर्ण और मधुर शब्दों में बार-बार आपके अनंत चरित्र का गान कर रहे हैं। हे शेषाद्रि-शिखर के स्वामी, आपका सुप्रभात हो।

भृङ्गावली च मकरन्दरसानुविद्ध-Bhringavali Cha Makaranda Rasanuviddha

झङ्कारगीतनिनदैः सह सेवनाय ।Jhankara Gita Ninadaih Saha Sevanaya

निर्यात्युपान्तसरसीकमलोदरेभ्यःNiryatyupanta Sarasi Kamalodarebhyah

शेषाद्रिशेखरविभो तव सुप्रभातम् ॥Sheshadri Shekhara Vibho Tava Suprabhatam

मकरंद-रस में डूबी भौंरों की पंक्तियाँ गुंजार-गीत गाती हुई, आपकी सेवा के लिए पास के सरोवरों के कमलों के भीतर से निकल रही हैं। हे शेषाद्रि-शिखर के स्वामी, आपका सुप्रभात हो।

योषागणेन वरदध्नि विमथ्यमानेYoshaganena Varadadhni Vimathyamane

घोषालयेषु दधिमन्थनतीव्रघोषाः ।Ghoshalayeshu Dadhimanthana Tivra Ghoshah

रोषात्कलिं विदधते ककुभश्च कुम्भाःRoshat Kalim Vidadhate Kakubhashcha Kumbhah

शेषाद्रिशेखरविभो तव सुप्रभातम् ॥Sheshadri Shekhara Vibho Tava Suprabhatam

ग्वालों के घरों में स्त्रियाँ उत्तम दही मथ रही हैं; मथानी की तीव्र ध्वनि से घड़े और गूँजती दिशाएँ मानो आपस में होड़ करते हुए कलह कर रहे हैं। हे शेषाद्रि-शिखर के स्वामी, आपका सुप्रभात हो।

पद्मेशमित्रशतपत्रगतालिवर्गाःPadmesha Mitra Shatapatra Gatalivargah

हर्तुं श्रियं कुवलयस्य निजाङ्गलक्ष्म्या ।Hartum Shriyam Kuvalayasya Nijanga Lakshmya

भेरीनिनादमिव बिभ्रति तीव्रनादंBheri Ninadam Iva Bibhrati Tivra Nadam

शेषाद्रिशेखरविभो तव सुप्रभातम् ॥Sheshadri Shekhara Vibho Tava Suprabhatam

सूर्य के मित्र कमलों में बैठे भ्रमर-समूह, मानो अपने अंगों की श्याम कांति से नीलकमल की शोभा छीनने निकले हों, नगाड़ों जैसा तीव्र गुंजार कर रहे हैं। हे शेषाद्रि-शिखर के स्वामी, आपका सुप्रभात हो।

श्रीमन्नभीष्टवरदाखिललोकबन्धोSriman Abhishta Varadakhila Loka Bandho

श्रीश्रीनिवास जगदेकदयैकसिन्धो ।Sri Srinivasa Jagadeka Dayaika Sindho

श्रीदेवतागृहभुजान्तरदिव्यमूर्तेSri Devata Griha Bhujantara Divya Murte

श्रीवेङ्कटाचलपते तव सुप्रभातम् ॥Sri Venkatachalapate Tava Suprabhatam

हे श्रीमान, मनोवांछित वर देने वाले, समस्त लोकों के बंधु! हे श्रीनिवास, जगत के एकमात्र दया-सागर! हे दिव्यमूर्ति, जिनका वक्षस्थल लक्ष्मीजी का निवास है! हे श्री वेंकटाचलपति, आपका सुप्रभात हो।

श्रीस्वामिपुष्करिणिकाप्लवनिर्मलाङ्गाःSri Swami Pushkarinika Plava Nirmalangah

श्रेयोऽर्थिनो हरविरिञ्चिसनन्दनाद्याः ।Shreyorthino Hara Viranchi Sanandanadyah

द्वारे वसन्ति वरवेत्रहतोत्तमाङ्गाःDvare Vasanti Vara Vetra Hatottamangah

श्रीवेङ्कटाचलपते तव सुप्रभातम् ॥Sri Venkatachalapate Tava Suprabhatam

कल्याण के इच्छुक शिव, ब्रह्मा, सनंदन आदि, स्वामी पुष्करिणी में स्नान कर निर्मल होकर आपके द्वार पर प्रतीक्षा कर रहे हैं, और भीड़ सँभालते द्वारपालों की छड़ियाँ उनके सिरों को छू रही हैं। हे श्री वेंकटाचलपति, आपका सुप्रभात हो।

श्रीशेषशैलगरुडाचलवेङ्कटाद्रि-Sri Shesha Shaila Garudachala Venkatadri

नारायणाद्रिवृषभाद्रिवृषाद्रिमुख्याम् ।Narayanadri Vrishabhadri Vrishadri Mukhyam

आख्यां त्वदीयवसतेरनिशं वदन्तिAkhyam Tvadiya Vasater Anisham Vadanti

श्रीवेङ्कटाचलपते तव सुप्रभातम् ॥Sri Venkatachalapate Tava Suprabhatam

भक्तजन आपके निवास-पर्वत के पवित्र नाम, जैसे शेषशैल, गरुडाचल, वेंकटाद्रि, नारायणाद्रि, वृषभाद्रि, वृषाद्रि आदि, निरंतर जपते रहते हैं। हे श्री वेंकटाचलपति, आपका सुप्रभात हो।

सेवापराः शिवसुरेशकृशानुधर्म-Sevaparah Shiva Suresha Krishanu Dharma

रक्षोऽम्बुनाथपवमानधनाधिनाथाः ।Rakshombunatha Pavamana Dhanadhinathah

बद्धाञ्जलिप्रविलसन्निजशीर्षदेशाःBaddhanjali Pravilasan Nija Shirsha Deshah

श्रीवेङ्कटाचलपते तव सुप्रभातम् ॥Sri Venkatachalapate Tava Suprabhatam

आपकी सेवा में तत्पर आठों दिक्पाल (शिव, इंद्र, अग्नि, यम, निर्ऋति, वरुण, वायु और कुबेर) अपने सिरों पर अंजलि बाँधे खड़े हैं। हे श्री वेंकटाचलपति, आपका सुप्रभात हो।

धाटीषु ते विहगराजमृगाधिराज-Dhatishu Te Vihagaraja Mrigadhiraja

नागाधिराजगजराजहयाधिराजाः ।Nagadhiraja Gajaraja Hayadhirajah

स्वस्वाधिकारमहिमाधिकमर्थयन्तेSvasvadhikara Mahimadhikam Arthayante

श्रीवेङ्कटाचलपते तव सुप्रभातम् ॥Sri Venkatachalapate Tava Suprabhatam

आपकी शोभायात्राओं में आपको वहन करने वाले पक्षिराज गरुड़, मृगराज सिंह, नागराज शेष, गजराज और अश्वराज, सब अपने-अपने सेवा-अधिकार की महिमा और बढ़ने की प्रार्थना कर रहे हैं। हे श्री वेंकटाचलपति, आपका सुप्रभात हो।

सूर्येन्दुभौमबुधवाक्पतिकाव्यसौरि-Suryendu Bhauma Budha Vakpati Kavya Sauri

स्वर्भानुकेतुदिविषत्परिषत्प्रधानाः ।Svarbhanu Ketu Divishat Parishat Pradhanah

त्वद्दासदासचरमावधिदासदासाःTvaddasa Dasa Charamavadhi Dasa Dasah

श्रीवेङ्कटाचलपते तव सुप्रभातम् ॥Sri Venkatachalapate Tava Suprabhatam

सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु, जो देवसभा के प्रमुख हैं, स्वयं को आपके दासों के दासों की परंपरा में सबसे अंतिम के भी दास मानते हैं। हे श्री वेंकटाचलपति, आपका सुप्रभात हो।

त्वत्पादधूलिभरितस्फुरितोत्तमाङ्गाःTvat Pada Dhuli Bharita Sphuritottamangah

स्वर्गापवर्गनिरपेक्षनिजान्तरङ्गाः ।Svargapavarga Nirapeksha Nijantarangah

कल्पागमाकलनयाकुलतां लभन्तेKalpagamakalanayakulatam Labhante

श्रीवेङ्कटाचलपते तव सुप्रभातम् ॥Sri Venkatachalapate Tava Suprabhatam

जिनके मस्तक आपकी चरण-धूलि से दीप्त हैं और जिनका मन स्वर्ग या मोक्ष की भी अपेक्षा नहीं रखता, ऐसे भक्त केवल इस विचार से व्याकुल होते हैं कि कहीं कल्प का अंत आकर यह सेवा न छीन ले। हे श्री वेंकटाचलपति, आपका सुप्रभात हो।

त्वद्गोपुराग्रशिखराणि निरीक्षमाणाःTvad Gopuragra Shikharani Nirikshamanah

स्वर्गापवर्गपदवीं परमां श्रयन्तः ।Svargapavarga Padavim Paramam Shrayantah

मर्त्या मनुष्यभुवने मतिमाश्रयन्तेMartya Manushya Bhuvane Matim Ashrayante

श्रीवेङ्कटाचलपते तव सुप्रभातम् ॥Sri Venkatachalapate Tava Suprabhatam

आपके गोपुरों के शिखरों के दर्शन मात्र से मनुष्य स्वयं को स्वर्ग और मोक्ष के परम पद पर पहुँचा हुआ अनुभव करते हैं, और इसलिए इसी मनुष्य लोक में (आपके समीप) रहने का मन बना लेते हैं। हे श्री वेंकटाचलपति, आपका सुप्रभात हो।

श्रीभूमिनायक दयादिगुणामृताब्धेSri Bhumi Nayaka Dayadi Gunamritabdhe

देवाधिदेव जगदेकशरण्यमूर्ते ।Devadhideva Jagadeka Sharanya Murte

श्रीमन्ननन्तगरुडादिभिरर्चिताङ्घ्रेSriman Ananta Garudadibhir Architanghre

श्रीवेङ्कटाचलपते तव सुप्रभातम् ॥Sri Venkatachalapate Tava Suprabhatam

हे श्रीदेवी और भूदेवी के स्वामी, दया आदि गुणों के अमृत-सागर! हे देवाधिदेव, जगत के एकमात्र शरणदाता! हे श्रीमान, जिनके चरणों की पूजा अनंत, गरुड़ आदि करते हैं! हे श्री वेंकटाचलपति, आपका सुप्रभात हो।

श्रीपद्मनाभ पुरुषोत्तम वासुदेवSri Padmanabha Purushottama Vasudeva

वैकुण्ठ माधव जनार्दन चक्रपाणे ।Vaikuntha Madhava Janardana Chakrapane

श्रीवत्सचिह्न शरणागतपारिजातSrivatsa Chihna Sharanagata Parijata

श्रीवेङ्कटाचलपते तव सुप्रभातम् ॥Sri Venkatachalapate Tava Suprabhatam

हे पद्मनाभ, पुरुषोत्तम, वासुदेव! हे वैकुंठ, माधव, जनार्दन, चक्रपाणि! हे श्रीवत्स-चिह्नधारी, शरणागतों के लिए पारिजात वृक्ष! हे श्री वेंकटाचलपति, आपका सुप्रभात हो।

कन्दर्पदर्पहरसुन्दरदिव्यमूर्तेKandarpa Darpa Hara Sundara Divya Murte

कान्ताकुचाम्बुरुहकुड्मललोलदृष्टे ।Kanta Kuchamburuha Kudmala Lola Drishte

कल्याणनिर्मलगुणाकरदिव्यकीर्तेKalyana Nirmala Gunakara Divya Kirte

श्रीवेङ्कटाचलपते तव सुप्रभातम् ॥Sri Venkatachalapate Tava Suprabhatam

हे सुंदर दिव्यमूर्ति, जो कामदेव के सौंदर्य-गर्व को भी हर लेते हैं; जिनकी प्रेमभरी दृष्टि प्रिया लक्ष्मी पर टिकी रहती है; हे कल्याणकारी निर्मल गुणों की खान, दिव्य कीर्ति वाले! हे श्री वेंकटाचलपति, आपका सुप्रभात हो।

मीनाकृते कमठकोलनृसिंहवर्णिन्Minakrite Kamatha Kola Nrisimha Varnin

स्वामिन् परश्वथतपोधन रामचन्द्र ।Svamin Parashvatha Tapodhana Ramachandra

शेषांशराम यदुनन्दन कल्किरूपSheshamsha Rama Yadunandana Kalki Rupa

श्रीवेङ्कटाचलपते तव सुप्रभातम् ॥Sri Venkatachalapate Tava Suprabhatam

हे मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह और वामन रूप धारण करने वाले स्वामी! हे फरसाधारी तपस्वी परशुराम, हे रामचंद्र! हे शेषांश बलराम, हे यदुनंदन कृष्ण, हे कल्कि रूप! हे श्री वेंकटाचलपति, आपका सुप्रभात हो।

एलालवङ्गघनसारसुगन्धितीर्थंEla Lavanga Ghanasara Sugandhi Tirtham

दिव्यं वियत्सरिति हेमघटेषु पूर्णम् ।Divyam Viyat Sariti Hema Ghateshu Purnam

धृत्वाऽद्य वैदिकशिखामणयः प्रहृष्टाःDhritvadya Vaidika Shikhamanayah Prahrishtah

तिष्ठन्ति वेङ्कटपते तव सुप्रभातम् ॥Tishthanti Venkatapate Tava Suprabhatam

वैदिक विद्वानों में श्रेष्ठ ब्राह्मण आज आकाशगंगा के दिव्य जल को, जो इलायची, लौंग और कपूर से सुगंधित है, सोने के घड़ों में भरकर प्रसन्नता से (आपके अभिषेक के लिए) खड़े हैं। हे वेंकटपति, आपका सुप्रभात हो।

भास्वानुदेति विकचानि सरोरुहाणिBhasvan Udeti Vikachani Saroruhani

सम्पूरयन्ति निनदैः ककुभो विहङ्गाः ।Sampurayanti Ninadaih Kakubho Vihangah

श्रीवैष्णवास्सततमर्थितमङ्गलास्तेSri Vaishnavas Satatam Arthita Mangalaste

धामाश्रयन्ति तव वेङ्कट सुप्रभातम् ॥Dhamashrayanti Tava Venkata Suprabhatam

तेजस्वी सूर्य उदय हो रहा है, कमल खिल उठे हैं, पक्षी अपने कलरव से दिशाओं को भर रहे हैं। सदा आपके मंगल की कामना करने वाले श्रीवैष्णव भक्त आपके धाम में आ पहुँचे हैं। हे वेंकट, आपका सुप्रभात हो।

ब्रह्मादयस्सुरवरास्समहर्षयस्तेBrahmadayas Suravaras Samaharshayaste

सन्तस्सनन्दनमुखास्त्वथ योगिवर्याः ।Santas Sanandana Mukhas Tvatha Yogivaryah

धामान्तिके तव हि मङ्गलवस्तुहस्ताःDhamantike Tava Hi Mangala Vastu Hastah

श्रीवेङ्कटाचलपते तव सुप्रभातम् ॥Sri Venkatachalapate Tava Suprabhatam

ब्रह्मा आदि श्रेष्ठ देवता महर्षियों सहित, सनंदन आदि संत और श्रेष्ठ योगीजन हाथों में मंगल-द्रव्य लिए आपके धाम के समीप खड़े हैं। हे श्री वेंकटाचलपति, आपका सुप्रभात हो।

लक्ष्मीनिवास निरवद्यगुणैकसिन्धोLakshmi Nivasa Niravadya Gunaika Sindho

संसारसागरसमुत्तरणैकसेतो ।Samsara Sagara Samuttaranaika Seto

वेदान्तवेद्यनिजवैभव भक्तभोग्यVedanta Vedya Nija Vaibhava Bhakta Bhogya

श्रीवेङ्कटाचलपते तव सुप्रभातम् ॥Sri Venkatachalapate Tava Suprabhatam

हे लक्ष्मीनिवास, निर्दोष गुणों के एकमात्र सागर! हे संसार-सागर से पार उतारने वाले एकमात्र सेतु! हे वेदांत से जाने जाने वाले वैभव वाले, भक्तों के परम आनंद! हे श्री वेंकटाचलपति, आपका सुप्रभात हो।

इत्थं वृषाचलपतेरिह सुप्रभातंIttham Vrishachalapater Iha Suprabhatam

ये मानवाः प्रतिदिनं पठितुं प्रवृत्ताः ।Ye Manavah Pratidinam Pathitum Pravrittah

तेषां प्रभातसमये स्मृतिरङ्गभाजांTesham Prabhata Samaye Smritir Angabhajam

प्रज्ञां परार्थसुलभां परमां प्रसूते ॥Prajnam Parartha Sulabham Paramam Prasute

जो मनुष्य वृषाचलपति के इस सुप्रभात का प्रतिदिन पाठ करने में लगे रहते हैं, परंपरा के अनुसार प्रभात समय का यह स्मरण उन्हें वह परम प्रज्ञा प्रदान करता है जिससे जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य सुलभ हो जाता है।

पूर्ण

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प्रश्न

सुप्रभातम् किस समय गाना या सुनना चाहिए?

सुबह जल्दी, हो सके तो ब्रह्म मुहूर्त में, यानी सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पहले। तिरुमला में प्रभु को जगाने के लिए इसे भोर से पहले गाया जाता है। घर पर बहुत से परिवार नहाने के बाद, दिन शुरू होने से पहले इसे सुनते या पढ़ते हैं। देर से उठें, तब भी सुबह श्रद्धा से पढ़ना अच्छा है।

वेंकटेश्वर सुप्रभातम् किसने लिखा?

प्रतिवादि भयंकरम् अण्णंगराचार्य ने, जिन्हें प्यार से अण्णन् कहते हैं। वे १५वीं शताब्दी के श्रीवैष्णव विद्वान और मणवाळ मामुनिगळ के शिष्य थे। केवल पहला श्लोक पुराना है। वह वाल्मीकि रामायण से है, जहाँ विश्वामित्र "कौसल्या सुप्रजा राम" कहकर बालक राम को जगाते हैं।

वेंकटेश्वर सुप्रभातम् में कितने श्लोक हैं?

२९, जिनमें अंतिम फलश्रुति है। इस पृष्ठ पर यही भाग है, और इसके पाठ में लगभग १०–१२ मिनट लगते हैं। पूरे प्रातःपाठ में उन्हीं कवि के तीन और स्तोत्र जुड़ते हैं: वेंकटेश स्तोत्रम् (११ श्लोक), प्रपत्ति (१६) और मंगलाशासनम् (१४)। प्रचलित संस्करण में कुल लगभग ७० श्लोक होते हैं। ये तीन स्तोत्र अभी इस पृष्ठ पर नहीं हैं।

रोज़ सुप्रभातम् सुनने के क्या लाभ हैं?

परंपरा के अनुसार भोर में इस स्तोत्र से प्रभु को याद करने से मन शांत और साफ़ होता है, और इसका अंतिम श्लोक उत्तम प्रज्ञा की बात करता है। बहुत से परिवारों को लगता है कि इससे घर में दिन की शुरुआत शांत और मंगलमय होती है। ये भक्ति की मान्यताएँ हैं, कोई गारंटी नहीं।

क्या तिरुमला में पूरे वर्ष सुप्रभातम् गाया जाता है?

लगभग। धनुर्मास (तमिल मार्गऴि मास, लगभग मध्य दिसंबर से मध्य जनवरी) में तिरुमला में इसकी जगह आंडाल की तिरुप्पावै गाई जाती है। बहुत से परिवार घर पर भी ऐसा ही करते हैं और महीना पूरा होने पर फिर सुप्रभातम् शुरू करते हैं।

स्रोत और समीक्षा

स्रोत: Sri Venkatesa Suprabhatam (Suprabhatam section, 29 shlokas) as recited in the Tirumala Suprabhata Seva; text collated from sanskritdocuments.org (venkatsp), stotranidhi.com (Devanagari edition), sa.wikisource.org (श्रीवेङ्कटेशसुप्रभातम्) and shlokam.org

Opening verse from Valmiki Ramayana, Bala Kanda 23.2. Where editions differ we follow the majority reading: 9 तन्त्रीप्रकर्ष (not प्रहर्ष) and करचाररम्यं (not करचारु); 14 हरविरिञ्चि (some print विरिञ्च); 17 महिमाधिकम् (some print महिमादिकम्); 24 परश्वथ (sanskritdocuments has परश्वध); 25 सुगन्धि (stotranidhi has सुगन्ध); 27 मुखास्त्वथ (variant मुखास्तव). The double avagraha (ऽऽ) some editions print in 14 and 19 is omitted, which is standard orthography and does not change the sound. Meanings are Nitya's own.

मूल पाठ को यहाँ बताए गए स्रोतों से पंक्ति-दर-पंक्ति मिलाया गया है। अर्थ AI की मदद से लिखा गया मसौदा हैं। अभी किसी विद्वान ने इनकी जाँच नहीं की है।

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त्रुटि बताएँ अंतिम अद्यतन 2026-09-27

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